कवि की जुबां से हर शब्द हरसिंगार के फूल जैसे झर- झर कर झरते ... - CG Sandesh

कवि की जुबां से हर शब्द हरसिंगार के फूल जैसे झर- झर कर झरते थे : डॉ अनुसुइया

राजभाषा आयोग का आठवां प्रांतीय सम्मेलन राजधानी रायपुर के वुड कैसल होटल में छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में विवेक आचार्य संचालक संस्कृति एवं राजभाषा तथा डॉ अभिलाषा बेहार सचिव छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के कुशल मार्गदर्शन में एक और दो मार्च को आयोजित किया गया। माननीय मुख्य अतिथि ने इस वृहद आयोजन के लिए आयोग को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए प्रांतीय सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन किया।

भोजन उपरांत आयोजित द्वितीय सत्र में छत्तीसगढ़ के स्मृतिशेष साहित्यकारों की याद में पुरखा के सुरता सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ के जाने-माने साहित्यकारों शिक्षाविदों के द्वारा दिवंगत स्थापित साहित्यकारों के व्यक्तित्व कृतित्व और साहित्यिक योगदान पर वक्तव्य प्रस्तुत किया गया।

प्रो डॉ अनुसुइया अग्रवाल डी लिट् प्राचार्य स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय महासमुंद ने छत्तीसगढ़ के जाने-माने गीतकार/ कवि डॉ विमल कुमार पाठक पर अपना वक्तव्य छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रस्तुत करते हुए कहा कि विमल पाठक जी के पास बोलने का खास अंदाज था या यूं कहें कि वे आम बात को भी इस अंदाज में बोलते थे कि वह खास लगने लगता था..... मां शारदे ने अपने अकूत भंडार में से शब्द, भाव, ज्ञान, सुर और स्वर से उन्हें नवाज़ा था। जब विमल पाठक लोक धुन में मंच पर गाना शुरू करते थे तो समूचा वातावरण उनकी मधुर आवाज के गूंज से खनक उठता था.... ऐसा लगता था जैसे हरसिंगार के फूल झर- झर कर झर रहे हो।

छत्तीसगढ़ के माटी पुत्र कृषकों पर काव्य रचना करते हुए उन्होंने लिखा था कि-

नो हव गा किसान। तुमन नो हव गा किसान।।

जम्मों देश भर उपजाथों। तुमन राहेर गहूं धान।।

आवव भुइंया के भगवान। तुमन नो हव गा किसान।।

बहु आयामी व्यक्तित्व के धनी विमल पाठक जी ने विविध विषयों पर साहित्य लेखन किया। विषय की विविधता की भांति उनके जीवन और कार्य व्यवहार में भी काफी विविधता थी। डॉ अग्रवाल के द्वारा लगभग 20 मिनट प्रस्तुत वक्तव्य को मंच सहित पूरे सदन की सराहना मिली।

इसी कड़ी में डॉ देवधर महंत ने डॉ पालेश्वर शर्मा जी, श्री रामेश्वर वैष्णव ने श्री दानेश्वर शर्मा जी, श्री ललित शर्मा ने संत पवन दीवान जी, श्रीमती सरला शर्मा ने कवि मुकुंद कौशल जी पर अपना सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किया।

विदित हो कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का यह आयोजन लगातार दो दिन तक चला, जिसमें पूरे छत्तीसगढ़ के कवियों, साहित्यकारों ने एकत्रित होकर इस महायज्ञ को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

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