PM -JVM एवं पीएम जनमन योजना से आदिवासियों को मिल रहा रोज़गार
लोकसभा में केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य
मंत्री (एमओएस) दुर्गादास उइके ने आज मुरारी लाल मीणा और एडवोकेट गोवाल कागड़ा पदवी
के एक अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन
(पीएमजेवीएम) और प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) योजनाओं के अंतर्गत, मंत्रालय राज्य सरकारों को वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) स्थापित करने के लिए
वित्तीय सहायता प्रदान करता है। जो आदिवासी स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के समूह हैं।
वीडीवीके से जुड़े आदिवासी सदस्यों को प्रशिक्षण और अग्रिम बाज़ार संपर्क प्रदान किए
जाते हैं । इससे उनकी आजीविका/स्व-रोज़गार गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा
ट्राइफेड जनजातीय कारीगरों को आपूर्तिकर्ताओं के रूप में सूचीबद्ध करके और उनसे उत्पादों
की खरीद करके जनजातीय उपज/उत्पादों के विपणन के लिए बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज का कार्य
करता है।
ट्राइफेड ने राजस्थान के दौसा जिले में 90 परिवारों से जुड़े 11 कारीगरों/आपूर्तिकर्ताओं को सूचीबद्ध किया है। राजस्थान सहित वन धन विकास केंद्रों का राज्यवार विवरण अनुबंध 1 में दिया गया है।
इसके अतिरिक्त जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) पात्र अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को आय सृजन गतिविधियाँ/स्व-रोज़गार शुरू करने के लिए रियायती ऋण प्रदान करता है । इससे उनमें उद्यमिता की भावना का संचार होता है। राजस्थान सहित पिछले पाँच वर्षों में सहायता प्राप्त लाभार्थियों और उन्हें वितरित ऋणों का राज्यवार विवरण अनुबंध 2 में दिया गया है।
पीएमजेवीएम योजना के अंतर्गत मंत्रालय ने 20 लाख रुपये की परिक्रामी निधि प्रदान की है। राजस्थान सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर लघु वनोपज (एमएफपी) की खरीद के लिए 20 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है। अब तक राजस्थान राज्य ने 251.88 लाख रुपये मूल्य के 377.51 मीट्रिक टन लघु वनोपज की खरीद की सूचना दी है।