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हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ईद-उल-अज्हा, पूरे देश के लिए मांगी अमन चैन की दुआ

सरायपाली. सोमवार को मुस्लिम भाईयों ने बकरीद (ईद उल अज्हा) का त्यौहार धूमधाम से मनाया. इस अवसर पर सुबह 9 बजे ईदगाह में ईद उल अज्हा की नमाज पेश ईमाम अब्दुस्सत्तार अशरफी साहब की इमामत में अदा की गई. ईमाम अशरफी ने कौम को संबोधित करते हुए आज के दिन के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कुर्बानी का सही तरीका बयान किया. समर्पित भाव एवं त्याग को मूल बताया तथा सिराते मुस्तकीम पर अमल करने की हिदायत दी.

इस दौरान हजारों की तादाद में मुस्लिम भाई शामिल हुए. मौलाना साहब द्वारा ईद उल अज्हा की नमाज अदा करते हुए सभी मुस्लिम जनों को बधाई दी गई एवं सभी के द्वारा सरायपाली , छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के लिए अमन चैन की दुआ मांगी गई. सबसे पहले जुलूस की शक्ल में मुस्लिम समाज के लोग ईदगाह में इकट्ठे हुए, जहाँ नमाज अदा करने के पश्चात एक दूसरे को गले मिलकर बधाई दी.

त्यौहार को लेकर कुछ दिनों पूर्व से ही मुस्लिम समाज के लोग अपनी अपनी तैयारियों में जुटे थे. आज12 अगस्त सोमवार को सुबह से ही मुस्लिम समुदाय के लोग ईदगाह (कब्रस्तान) पहुंचे, जहां सदस्यों द्वारा साफ सफाई कर सजाया गया था. इसके पश्चात कई घरों में कुर्बानी की रस्म अदा की गई. कुर्बानी के प्रसाद का एक हिस्सा गरीबों में, एक हिस्सा समुदाय के अपने-अपने परिजनों के यहां बांटकर एक दूसरे को त्यौहार की बधाई दी गई.

पूर्व में सम्पन्न परिवार द्वारा घर-घर पहुँचाकर कुर्बानी का प्रसाद दिया जाता था. विगत दो वर्षों से सम्पन्न परिवारों द्वारा मदरसा निजामिया में जरूरतमंद गरीबों के लिए प्रसाद जमा किया जाता है. इसके बाद समाज के कुछ लोगों के द्वारा गरीब परिवारों, यतीम, फकीर, मिस्कीन, बेवा, बेसहारा, लाचार और जरूरतमंद लोगों तक उक्त प्रसाद को बाँटा जाता है. त्यौहार के मद्देनजर पुलिस प्रशासन के द्वारा भी चाक चैबंद व्यवस्था की गई थी. सहयोग के लिए मुस्लिम समाज के अध्यक्ष मुजफ्फार खान एवं समाज के सदस्यों ने नगर पालिका एवं पुलिस प्रशासन सहित सभी का आभार व्यक्त किया.

मुसलमान पर कुर्बानी फर्ज है

बकरीद के बारे में बताते हुए मौलाना साहब ने कहा कि पैगम्बर हजरते इब्राहीम व इस्माईल अलैहिस सलाम की याद में यह पर्व मनाया जाता है, हर साहिबे निसाब मुसलमान पर कुर्बानी फर्ज है. उन्होने कहा कि जो मुसलमान साढ़े 52 तोला चांदी या साढे“ 7 तोला सोना के मालिक हैं या इन दोनों में से किसी एक के मालिक हैं और जिनके ऊपर किसी प्रकार का कर्ज न हो ऐसे लोगों को बकरीद की कुर्बानी देनी चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आज की तारीख में सभी मुस्लिम भाई बकरीद के अवसर पर पैगम्बर साहब के नाम पर कुर्बानी दे रहे हैं.

इसलिए दी जाती है कुर्बानी

इस्लाम को मानने वाले लोगों के लिए बकरीद का विशेष महत्व है. इस्लामिक मान्यता के अनुसार हजरत इब्राहीम अपने बेटे हजरत इस्माईल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर खुदा की राह में कुर्बान करने जा रहे थे. तब अल्लाह ने उनके नेक जज्बे को देखते हुए उनके बेटे को जीवनदान दे दिया. यह पर्व इसी की याद में मनाया जाता है. इसके बाद अल्लाह के हुक्म पर इंसानों की नहीं बकरे की कुर्बानी देने की इस्लामिक कानून शुरू हो गया. आज के ही दिन हजरत इब्राहिम को लगा कि कुर्बानी देते समय उनकी भावनाएं आड़े आ सकती हैं, इसलिए उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी. जब उन्होंने अपना काम पूरा करने के बाद पट्टी हटाई तो अपने पुत्र को सामने जीवित देखा. जबकि बेदी पर कटा हुआ दुम्बा (सउदी में पाया जाने वाला भेंड़ जैसा जानवर) पड़ा हुआ था, तभी से इस मौके पर कुर्बानी देने की प्रथा चली आ रही है.

इस अवसर पर मुस्लिम भाईयों को बधाई देने के लिए कांग्रेस शहर अध्यक्ष अमृत पटेल, महेन्द्र बाघ, गोपाल अग्रवाल आदि गणमान्यजन भी ईदगाह पहुँचे और सभी को ईद उल अज्हा की बधाई दी.

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