ब्लॉक के आंगनबाड़ी में एक चैथाई बच्चे कुपोषण का शिकार - CG Sandesh

ब्लॉक के आंगनबाड़ी में एक चैथाई बच्चे कुपोषण का शिकार

प्रतिमाह लगभग 30 कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाता है सुपोषित

सरायपाली. महिला बाल विकास के अंतर्गत 302 आंगनबाड़ी केन्द्र एवं 19 मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र आते हैं. जिसमें 0 से 5 वर्ष तक के 13924 बच्चों का नाम दर्ज है. अप्रैल से अगस्त तक की स्थिति में यहाँ 10985 सुपोषित, 2436 मध्यम कुपोषित एवं 503 गंभीर कुपोषित बच्चे हैं. आंकड़ों पर नजर डालें तो लगभग एक चैथाई बच्चे ब्लॉक में कुपोषित हैं, जिन्हें पोषण पुनर्वास केन्द्र (स्वास्थ्य केन्द्र सरायपाली) में प्रतिमाह कुपोषण के इलाज के लिए भेजा जाता है. जिनका लगभग 15 दिन तक भरती रखकर इलाज किया जाता है. यह संख्या 20-20 के आंकड़े में एक साथ भेजा जाता है.


जानकारी अनुसार वर्तमान में स्वास्थ्य केन्द्र में 15 कुपोषित बच्चे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैें. भरती बच्चों को सुपोषित होने के बाद ही अस्पताल से छुट्टी दी जाती है. समय-समय पर ग्रामीण अंचल में लगने वाले शिविर के माध्यम से भी बच्चों का इलाज करवाया जाता है. कुपोषण को कम करने के लिए ग्रामीण अंचल में प्रचार प्रसार भी होता है. अधिकांश बच्चे जन्म से ही कुपोषित होते हैं, जिनमें मध्यम कुपोषित बच्चे घर के ही पौष्टिक आहार के अलावा रेडी टू ईट में ही अधिकांश स्वस्थ हो जाते हैं.

सरायपाली स्वास्थ्य केन्द्र में बसना, सांकरा एवं पिथौरा तक के कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए लाया जाता है. ब्लॉक के ही लगभग 30 से 40 बच्चे माह में सुपोषित होकर घर जाते हैं. अप्रैल माह से अगस्त तक 120 कुपोषित बच्चों का इलाज भी अब तक किया जा चुका है. जिसमें से 109 बच्चे सुपोषित होकर घर गए हैं, जबकि 11 गंभीर कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल रिफर किया गया है.

बच्चों में कुपोषण का कारण बच्चों के कुपोषित होने के पीछे कई प्रकार के कारण माने जाते हैं. इनमें शरीर सक्षम न होने के बावजूद माँ बनना, एक बच्चे के जन्म के बाद तीन वर्ष का अंतराल न होना, 22 से कम व 35 वर्ष से अधिक उम्र में माँ बनना, गर्भावस्था के दौरान माताओं में एनीमिया की शिकायत होना भी बच्चे के कुपोषित होने का कारण माना जाता है.

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