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सरायपाली : बीईओ की चुप्पी, सिस्टम की मिलीभगत, लिमगांव स्कूल में शिक्षा व्यवस्था शर्मसार।

सरायपाली ब्लाक के शासकीय मिडिल स्कूल लिमगांव का बहुप्रतीक्षित जांच में अंतिम बयान आखिरकार 12 फरवरी को पूरी हो गया। जांच के दौरान तात्कालीन बीईओ प्रकाशचन्द्र मांझी, एबीइओ देव नारायण दीवान और जितेन्द्र कुमार रावल उपस्थित होकर बयान दर्ज कराए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि स्कूल के प्रधानपाठक धनीराम चौधरी लकवाग्रस्त थे। इसके बाबजूद उनकी जगह अध्यापन कार्य के लिए बाहरी युवक जितेन्द्र साहू को रखकर पढाई कराई जा रही थी। जो सीधे तौर पर नियमो का उल्लंघन है।

जितेन्द्र साहू को अध्यापन हेतु पहले रखा बाद में सूचना दी।
जानकारी के अनुसार 02 अगस्त 2022 को संकुल प्रभारी ठण्डाराम टिकुलिया और संकुल समन्वयक गिरधारी लाल पटेल ने लिखित में सूचना देकर बताया था कि प्रधानपाठक धनीराम चौधरी लकवे के कारण अध्यापन कार्य करने में असमर्थ है और उनकी जगह बाहरी व्यक्ति जितेन्द्र साहू को रखा गया है। इन दोनो अधिकारी ने गलत तरीके से जितेन्द्र साहू को अध्यापन कार्य हेतु रखने के बाद जानकारी दी। जो इनकी मिलीभगत और स्वेच्छाचारिता को स्पष्ट बयां कर रहा है। चौकाने वाली बात यह रही कि लिखित सूचना मिलने के बाबजूद तात्कालीन बीईओ प्रकाश चन्द्र मांझी ने समय रहते कोई ठोस आपत्ति दर्ज नही की। अब वे मौखिक अनुमति देने से इन्कार कर रहे है। जबकि समय पर पर कार्रवाई होती तो पूरा मामला ही टल सकता था।

औचक निरीक्षण में हुआ खुलासा 

11 अगस्त 2023 को हेमंत रमेश नंदनवार तात्कालीन एसडीएम सरायपाली ने औचक निरीक्षण कर पंचनामा तैयार कराया। जिस पर दोनो एबीइओ देव नारायण दीवान और जितेन्द्र कुमार रावल ने हस्ताक्षर की बात स्वीकार की। एसडीएम ने दबाबपूर्वक पंचनामा बनवाया इसे सिरे से दोनो ने नकारा है। सूत्रो के अनुसार उपस्थिति पत्रक हर माह अनिवार्य रूप से जमा नही होना भी गडबडी की बडी वजह सामने आई है।

लकवाग्रस्त शिक्षक नोटिस का जबाब देने खुद पहुंचा बीईओ कार्यालय।

मामले का सबसे संदिग्ध पहलू यह है कि 85 प्रतिशत लकवे से पीडित बताए गए शिक्षक धनीराम चौधरी बीईओ कार्यालय सरायपाली पहुंचकर कारण बताओ नोटिस का जबाब देने में सक्षम थे। लेकिन औचक निरीक्षण के बाद अपने स्कूल कभी नही पहुंचे। जबकि गृहग्राम के स्कूल में ही उनका पदस्थापना था। महिने भर बाद में जिला मेडिकल बोर्ड से गंभीर दिव्यागंता का प्रमाणपत्र बनवाया गया। जिससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खडे हो गए है।

सील मोहर लगाकर दूसरे करते थे दस्तखत

सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि यहां पर पदस्थ दो शिक्षक मनीष साहू और दिनेश पटेल ने बिना किसी वैधानिक आदेश के प्रधानपाठक का सील मोहर लगाकर खुद दस्तखत किए और शासकीय अभिलेखो में हस्तक्षेप किया। अंकसूची, दाखिल खारिज और निरीक्षण पंजी तक में इन दोनो के हस्ताक्षर पाए गए। जो स्पष्ट रूप से नियमो की धज्जियां उडाने जैसा है।

कार्रवाई की मांग तेज

जांच पूरी होने के बाद अब जिम्मेदारी तय होने और दोषियो पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। शिक्षा व्यवस्था में जिम्मेदार अधिकारियो की मिलीभगत और लापरवाही का यह मामला पूरे तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खडे कर रहा है।


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