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CG : पंचायत की कार्रवाई से सील हुई कार्यशाला, प्रशिक्षार्थी परेशान

छत्तीसगढ़ की माटी को अपनी उंगलियों से जीवंत रूप देने वाले राज्य स्तरीय पुरस्कृत टेराकोटा शिल्पकार परमेश्वर चक्रधारी पंचायत की कार्रवाई के चलते खुले आसमान के नीचे काम करने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत बांसला द्वारा उनकी कार्यशाला को सील कर दिए जाने के बाद वे आम के पेड़ के नीचे प्रशिक्षण देने के लिए विवश हैं। जानकारी के अनुसार, परमेश्वर चक्रधारी को वर्ष 2008-09 में तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ अंकित आनंद के प्रयासों से एक कार्यशाला भवन आवंटित किया गया था। आरोप है कि वर्तमान सरपंच जमुना तिरसुनिया ने व्यक्तिगत मतभेदों के चलते उक्त भवन को ‘शासकीय भूमि पर अतिक्रमण’ बताते हुए सील कर दिया। खुले आसमान के नीचे चल रहा प्रशिक्षण विडंबना यह है कि एक ओर शासन हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड, कोंडागांव द्वारा आयोजित 50 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आम के पेड़ के नीचे संचालित हो रहा है। कार्यशाला सील होने के कारण कोलकाता से आए डिजाइनर कौशिक घोष और प्रशिक्षक परमेश्वर चक्रधारी खुले में प्रशिक्षण दे रहे हैं। लगभग 20 प्रशिक्षार्थी कठिन परिस्थितियों में मिट्टी कला की बारीकियां सीख रहे हैं। 

प्रशिक्षार्थियों का कहना है कि कार्यशाला बंद होने से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। कलाकृतियों और कीमती सामग्री को खुले में रखने से उनके खराब होने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद वे कला सीखने के जज्बे के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं। विवाद की जड़ में व्यक्तिगत मतभेद? ग्रामीणों के अनुसार, विवाद की जड़ ग्राम पंचायत की नई सरपंच जमुना तिरसुनिया के साथ कथित व्यक्तिगत मतभेद हैं। सरपंच ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए कार्यशाला को अतिक्रमण घोषित कर सील कर दिया। परमेश्वर चक्रधारी का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए उन्होंने पंचायत से मरम्मत की अनुमति मांगी थी। पंचायत द्वारा फंड न होने की जानकारी दिए जाने के बाद उन्होंने ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित कर स्वयं के व्यय से मरम्मत कार्य करने की अनुमति ली थी। उनके पास पूर्व में जारी वैध पट्टा भी मौजूद है। प्रशासन पर अनदेखी का आरोप शिल्पकार का आरोप है कि उन्होंने एसडीएम भानुप्रतापपुर और तहसीलदार को लिखित आवेदन दिया, लेकिन उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया। 15 जनवरी को नोटिस जारी कर कार्यशाला का सामान बाहर निकलवा दिया गया और भवन को सील कर दिया गया। ग्रामीणों में रोष ग्रामीणों का कहना है कि जिस कार्यशाला से गांव की पहचान जुड़ी थी, आज वही स्थान विवाद का केंद्र बन गया है। पूर्व में कई वरिष्ठ अधिकारी यहां पहुंचकर कला की सराहना कर चुके हैं। ऐसे में एक सम्मानित कलाकार के साथ इस तरह की कार्रवाई से ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर समाधान निकालने की मांग की है, ताकि कला और कलाकार दोनों को संरक्षण मिल सके।


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