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ठगी पर लगेगी लगाम, डिजिटल ‘अरेस्ट’ स्कैम पर शिकंजा कसने केंद्र ने WhatsApp को दिए डिवाइस ID ब्लॉक करने के निर्देश

डेस्क। डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्ती बढ़ाते हुए वॉट्सऐप को ऐसे डिवाइस आईडी ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी में हो रहा है, ताकि स्कैमर्स बार-बार नए अकाउंट न बना सकें. इस तरह के फ्रॉड में ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में ऐसे 1.23 लाख मामले सामने आए, जिनमें करीब 1,935 करोड़ रुपये की ठगी हुई है.

डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी (IDC) की बैठक में सरकार ने मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप से कहा है कि वह उन डिवाइस आईडी को ब्लॉक करे, जो इन स्कैम्स में इस्तेमाल हो रही हैं. इससे ठग बार-बार नए अकाउंट नहीं बना पाएंगे. आपको बता दें कि डिजिटल अरेस्ट एक सोफिस्टिकेटेड साइबर फ्रॉड होता है. स्कैमर्स खुद को पुलिस, CBI, ED या अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारी बताते हैं.

 

वे वीडियो कॉल पर लोगों को डराते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में शामिल है. फिर वे पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं ताकि “अरेस्ट” से बच सकें. स्क्रीन शेयरिंग और म्यूल अकाउंट्स के जरिए पैसे जल्दी कई बैंकों और राज्यों में ट्रांसफर हो जाते हैं, जिससे ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में ऐसे 1.23 लाख मामले दर्ज हुए, जिनमें कुल 1,935 करोड़ रुपये की ठगी हुई. यह 2022 के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा है. कुल मिलाकर इन घोटालों से लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में खुद संज्ञान लिया था और इस बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता जताई थी.

हाई-लेवल कमिटी की बैठक
यूनियन होम मिनिस्ट्री द्वारा दिसंबर 2025 में गठित IDC की तीसरी बैठक की गई थी. ये बैठक तीन घंटे चली. WhatsApp के प्रतिनिधियों ने अपनी डिटेक्शन सिस्टम, एक्शन और सेफगार्ड्स पर विस्तार से जानकारी दी. कमिटी ने कई सुझाव दिए, जिन पर WhatsApp ने अमल करने का वादा किया है. सरकार ने WhatsApp को कई सुझाव दिए है.


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