मंत्रिमंडल ने 2035 तक भारत के कार्बन उत्सर्जन को 47 प्रतिशत तक कम करने की प्रतिबद्धता को मंजूरी दी
मंत्रिमंडल ने वर्ष 2031 से 2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय निर्धारित योगदान को मंजूरी दे दी है। इससे संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा संधि और पेरिस समझौते के तहत देश की प्रतिबद्धता और महत्वाकांक्षा और मजबूत होगी। साथ ही सतत विकास और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने की न्यायसंगत जिम्मेदारी भी प्रदर्शित होगी। मीडिया को जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत वर्ष 2035 तक 2005 के स्तर की तुलना में अपने जीडीपी की कार्बन उत्सर्जन तीव्रता को 47 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। फरवरी 2026 तक देश ने 52.57 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल कर ली है, जिससे लक्ष्य को निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही पूरा कर लिया गया है। अब इस लक्ष्य को बढ़ाकर 2035 तक स्थापित विद्युत क्षमता में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी गैर-जीवाश्य ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
श्री वैष्णव ने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना – संशोधित उड़ान योजना को वर्ष 2026-27 से वर्ष 2035-36 तक दस वर्षों की अवधि के लिए मंजूरी दे दी है। इस पर 28,840 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मंत्रिमंडल फैसलों की जानकारी देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा अनुपलब्ध हवाई पट्टियों से 100 नए हवाई अड्डों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में आर्थिक विकास, व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, साथ ही आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा किफायती बनेगी।
इसके अलावा, कैबिनेट ने आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण और ट्रैकिंग-आई.वी.एफ.आर.टी योजना को 31 मार्च, 2026 के बाद पांच साल की अवधि के लिए पहली अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक, 1800 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ जारी रखने को भी मंजूरी दे दी है। आई.वी.एफ.आर.टी प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भारत में आव्रजन, वीजा जारी करने और विदेशियों के पंजीकरण से संबंधित कार्यों को आपस में जोड़ना और उन्हें सुव्यवस्थित करना है। आई.वी.एफ.आर.टी का मुख्य उद्देश्य एक सुरक्षित और एकीकृत सेवा वितरण ढांचे के भीतर आव्रजन और वीजा सेवाओं का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है। इसका उद्देश्य वैध यात्रियों को सुविधा प्रदान करना और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।
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