CG : पोषण और कैंसर देखभाल, जाने वेदांता का बाल्को मेडिकल सेंटर कैंसर उपचार के दौरान कुपोषण से कैसे निपटता है
वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन का बाल्को मेडिकल सेंटर (बीएमसी) नया रायपुर में स्थित 170 बिस्तरों वाला एक अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल है, जहाँ छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहाँ आने वाले कई मरीज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से होते हैं और विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत उनका उपचार किया जाता है। कैंसर के इलाज के दौरान पोषण की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह न केवल मरीजों के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि उपचार के प्रति उनकी प्रतिक्रिया और लंबे समय के परिणामों पर भी सकारात्मक असर डालता है। इनमें से कई मरीजों के लिए पर्याप्त और नियमित पोषण तक पहुँच कैंसर की पहचान से पहले ही सीमित रही होती है।
कैंसर के इलाज के दौरान शरीर को अधिक कैलोरी और प्रोटीन की जरूरत होती है, लेकिन मतली, भूख कम लगना, मुँह में छाले, मुँह का सूखना, स्वाद में बदलाव और निगलने में दर्द जैसी समस्याएँ अक्सर भोजन की मात्रा को कम कर देती हैं। पोषण की जरूरत और वास्तविक सेवन के बीच यह असंतुलन तेजी से वजन घटने, कमजोरी, संक्रमण के बढ़ते खतरे और उपचार को सहन करने की क्षमता में कमी का कारण बन सकता है, जिससे लंबे समय में मरीज के स्वास्थ्य और जीवन-परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
इस कमी को दूर करने के लिए वेदांता के बीएमसी ने कीमोथेरेपी ले रहे मरीजों के लिए ‘हाई प्रोटीन डाइट’ प्लेटर की शुरुआत की, जिसे बीएमसी चैरिटेबल फंड के माध्यम से समर्थन दिया जा रहा है। इस प्लेटर में केले, बादाम, खजूर और प्रोटीन युक्त बिस्किट जैसे परिचित और आसानी से खाए जा सकने वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं। जो मरीज ठोस भोजन नहीं खा पाते, उनके लिए सत्तू का पानी और दाल का पानी जैसे प्रोटीन से भरपूर विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं।
पोषण सहयोग की आवश्यकता विशेष रूप से सिर और गर्दन के कैंसर से जूझ रहे मरीजों में अधिक होती है। ट्यूमर के स्थान और कीमोथेरेपी व रेडियोथेरेपी के दुष्प्रभावों के कारण कई मरीजों को खाना निगलने में कठिनाई होती है। इससे तेजी से वजन घटना, माँसपेशियों की ताकत कम होना और उपचार के दौरान थकान बढ़ना आम हो जाता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए बीएमसी ने दो इन-हाउस न्यूट्रिशन पैकेज के माध्यम से संरचित एंटरल फीडिंग सपोर्ट विकसित किया है। मरीजों का आकलन कर, निगलने में कठिनाई की अवधि और गंभीरता के आधार पर उन्हें नासोगैस्ट्रिक (एनजी) या पर्क्यूटेनियस एंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी (पीईजी) ट्यूब फीडिंग के जरिए पोषण दिया जाता है। इन पैकेजेस के तहत मरीजों को उच्च प्रोटीन युक्त तरल पोषण सप्लीमेंट सीधे प्रदान किए जाते हैं।
कैंसर से जूझ रहे बच्चे भी एक बेहद संवेदनशील समूह हैं। उनके बढ़ते शरीर को अधिक मात्रा में प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन और खनिजों की आवश्यकता होती है। बीएमसी की कडल्स फाउंडेशन के साथ साझेदारी के तहत अस्पताल अंडे, केले, मिल्कशेक जैसे हाई-प्रोटीन भोजन, मूँगफली की चिक्की जैसे ऊर्जा से भरपूर स्नैक्स और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मासिक राशन किट उपलब्ध कराता है। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को, विशेषकर आईसीयू में, आवश्यकता होने पर ट्यूब के माध्यम से पोषण सहायता भी दी जाती है।
इसके अलावा, अस्पताल में एक इन-हाउस क्लिनिकल डाइटिशियन भी हैं, जो प्रत्येक मरीज का मूल्यांकन करते हैं और उनकी बीमारी के प्रकार, चरण, उपचार पद्धति, दुष्प्रभावों और वर्तमान पोषण स्थिति के आधार पर व्यक्तिगत डाइट प्लान तैयार करते हैं।
हर मरीज की अलग जरूरतों के अनुसार देखभाल को तैयार करते हुए, वेदांता का बाल्को मेडिकल सेंटर यह सुनिश्चित करता है कि इलाज प्रभावी, सुरक्षित और मरीज-केंद्रित हो, खासकर मध्य भारत में, जहाँ ऐसी सुविधाओं की पहुँच सीमित है। यह समग्र दृष्टिकोण, जिसे एफआईसीसी हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवॉर्ड 2025 से राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, अस्पताल को एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में मजबूत बनाता है, जहाँ विशेषज्ञ चिकित्सा और संवेदनशील, समग्र देखभाल मिलकर ऐसे परिणाम देती हैं, जो वास्तव में मायने रखते हैं।