बसना : समर क्लास से संवर रहा बेटियों का भविष्य, बंसुला कस्तूरबा विद्यालय में शिक्षा के साथ हुनर का संगम
बसना विकासखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय बंसुला में इन दिनों समर क्लास के माध्यम से बालिकाओं के सर्वांगीण विकास की प्रेरणादायक पहल चल रही है। परीक्षा के बाद के समय को रचनात्मक और उपयोगी बनाने के उद्देश्य से 10 अप्रैल से शुरू हुआ यह विशेष समर कैंप 15 मई तक संचालित किया जा रहा है, जिसमें कक्षा 6वीं से 8वीं तक की 105 बालिकाएं उत्साहपूर्वक भाग ले रही हैं।
जिला मिशन समन्वयक रेखराज शर्मा और सहायक परियोजना समन्वयक विद्या साहू के दिशा निर्देश में विद्यालय की अधीक्षिका गीतांजलि नाग मार्गदर्शन में आयोजित इस समर क्लास में शिक्षा और कौशल विकास का संतुलित समावेश देखने को मिल रहा है।
यहां बालिकाओं को गणित और अंग्रेजी विषय की विशेष कक्षाओं के माध्यम से बौद्धिक विकास से जोड़ा जा रहा है, वहीं खेल, पीटी और योग के जरिए उनके शारीरिक स्वास्थ्य को भी मजबूत किया जा रहा है।
समर क्लास की खासियत यह है कि इसमें रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों को भी प्रमुखता दी गई है। रंगोली, पेंटिंग, मेंहदी और आर्ट एंड क्राफ्ट के जरिए बालिकाओं की सृजनात्मकता को निखारा जा रहा है।
वहीं सिलाई, कुकिंग और पार्लर से जुड़ी बेसिक ट्रेनिंग उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित कर रही है। इन गतिविधियों से बालिकाएं न केवल नई चीजें सीख रही हैं, बल्कि अपने हुनर को पहचानने और उसे विकसित करने का अवसर भी पा रही हैं।
इसके साथ ही कराटे और जुम्बा जैसी गतिविधियां बालिकाओं के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दे रही हैं। कराटे प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें आत्मरक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं, जिससे वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। वहीं जुम्बा और योग से उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है और मानसिक तनाव भी कम हो रहा है।
इस समर क्लास में बाहर से आए प्रशिक्षित ट्रेनरों का विशेष योगदान मिल रहा है। कराटे के लिए रुखमनी रूटिया, योग के लिए प्रेम पटेल, आर्ट एंड क्राफ्ट के लिए सुमिता सोनी, गणित के लिए रीता भोई, पेंटिंग के लिए हिमानी भट्ट और अंग्रेजी के लिए सपना गार्डिया बालिकाओं को अपने अनुभव से मार्गदर्शन दे रहे हैं, जिससे सीखने की प्रक्रिया और भी प्रभावी बन रही है।
विद्यालय की अधीक्षिका गीतांजलि नाग ने बताया कि इस समर क्लास का उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा के साथ जीवनोपयोगी कौशल से जोड़ना है, ताकि उनका समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से बालिकाओं में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच का विकास हो रहा है, जो उनके भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करेगा। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय स्टाफ की भूमिका भी सराहनीय रही है। सविता सिंह, किरण मालिक, संतोषी साव, रमा साहू और सुमिता सोनी लगातार बालिकाओं का मार्गदर्शन कर रही हैं और हर गतिविधि में सक्रिय सहयोग दे रही हैं।