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ममता बनर्जी ने पार्टी मीटिंग में इस्तीफा देने से किया इनकार, बर्खास्तगी का इंतजार

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रही है. 15 साल के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई है. इस बीच ममता बनर्जी ने अलग बखेड़ा खड़ा कर दिया है. उन्होंने चुनावी हार के बाद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है.

बुधवार को उन्होंने टीएमसी के नए चुने गए विधायकों के साथ बैठक में कहा कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी. उन्होंने पार्टी बैठक में साफ तौर पर अपने इरादे जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें मुझे निकालने दो, मैं इस्तीफा नहीं दूंगी.

बताते चलें कि टीएमसी की पार्टी बैठक कोलकाता के कालीघाट आयोजित की गई थी. ममता ने पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी के साथ मिलकर चुनावी हार के बाद पार्टी की आगे की राह तय करने के लिए मीटिंग को एड्रेस किया.

नए चुने गए विधायकों और पार्टी मीटिंग के संबोधन में ममता बनर्जी ने अपने पद पर बने रहने का इरादा जताया. साथ ही एक सिंबॉलिक प्रोटेस्ट की अपील की. ​​उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी.

उन्होंने कहा कि राज्यपाल द्वारा उनकी (खुद की) बर्खास्तगी का इंतजार करेंगी. साथ ही ममता ने अपनी पार्टी के मेंबर्स और नए चुने गए विधायकों से ‘ब्लैक डे’ के खिलाफ प्रोटेस्ट करने की अपील की. उन्होंने उनसे पश्चिम बंगाल असेंबली के पहले दिन काले कपड़े पहनने को कहा.

बंगाल में इंडी गठबंधन एक- ममता

एएनआई ने टीएमसी सूत्रों के हवाले से बताया, ‘बंगाल INDI गठबंधन की टीम अब एक हो गई है. मैं इस्तीफा नहीं दूंगी. उन्हें मुझे निकालने दो. मैं चाहती हूं कि यह एक काला दिन हो. हमें मजबूत होना होगा. असेंबली के पहले दिन, काले कपड़े पहनो. जिन्होंने धोखा दिया उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाएगा. मैं हंस रही हूं. मैंने उन्हें नैतिक रूप से हराया है. मैं एक आजाद पक्षी हूं. मैंने सभी के लिए काम किया है. हम हार गए होंगे, लेकिन हम लड़ेंगे. होम मिनिस्टर और प्राइम मिनिस्टर सीधे तौर पर शामिल हैं.’

उन्होंने चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया, यह दावा करते हुए कि पार्टी के कई पदाधिकारियों को निशाना बनाया गया था.

80 में से 10 विधायक अनुपस्थित रहे बंगाल के लोगों की सेवा हमारा कमिटमेंट- टीएमसी

पार्टी ने इस बैठक को लेकर बुधवार को एक बयान जारी किया है. उनके बयान में कहा गया है कि, ‘हमारी चेयरपर्सन ममता बनर्जी और नेशनल जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी ने कालीघाट में हमारे नेताओं के साथ एक मीटिंग की, जिसमें उन्हें क्लैरिटी, कॉन्फिडेंस, पक्का इरादा और अच्छी लड़ाई जारी रखने का नया मकसद दिया. सत्ता में हों या न हों, बंगाल के लोगों की सेवा करने का हमारा कमिटमेंट पक्का है. हम उनके साथ खड़े रहेंगे और बीजेपी के ज़ुल्म और अत्याचार का पूरी ताकत से विरोध करेंगे.’

बैठक में क्यों नहीं आए 10 विधायक

टीएमसी ने ममत-अभिषेक के बैठ में गैर-मौजूद विधयाकों को लेकर जवाब दिया है. पार्टी द्वारा जारी बयान में बताया गया कि मीडिया में कुछ विधायकों के आज की मीटिंग में नहीं आने की अटकलें चल रही हैं. कृपया ध्यान दें, सभी गैरहाजिर विधायक ने अपनी गैरहाजिरी के बारे में पहले ही बता दिया था या उनमें से कुछ को न आने के लिए कहा गया था. खासकर नॉर्थ बंगाल इलाके के विधायकों को. सागरदिघी विधायकों को परिवार में मेडिकल इमरजेंसी थी. बीरभूम में, काजल एसके को वहीं रुकने और चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों की मदद करने के लिए कहा गया था.

बीजेपी के ज़ुल्म और अत्याचार का विरोध करेंगे- टीएमसी

पार्टी के बयान के मुताबिक ममता बनर्जी द्वारा बुलाया गया ये मीटिंग पार्टी की एकता को मज़बूत करने, चुनावों के दौरान की गई गड़बड़ियों का जवाब देने और आगे की पार्टी की पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी बताने पर फोकस किया गया. टीएमसी ने बताया कि वह बीजेपी के ज़ुल्म और अत्याचार का पूरी ताकत से विरोध करती रहेगी, जिससे चुनाव के नतीजों के बाद फिर से एकजुट होने पर भी अग्रेसिव अपोजिशन रोल का संकेत मिलता है.


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