क्या शादीशुदा बेटी भी होगी अनुकंपा नौकरी के लिए पात्र? सुप्रीम कोर्ट ने कहा...
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी के मामले में मृतक की बेटी को सिर्फ इसलिए अयोग्य नहीं माना जा सकता है कि वह शादीशुदा है। कोर्ट ने कहा कि अगर विवाहित बेटी dependency certificate और परिवार के अन्य वयस्क सदस्यों की तरफ से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट दाखिल कर देती है तो वह भी अनुकंपा के आधार पर नौकरी या अन्य लाभ की हकदार है। मामला उत्तर प्रदेश के अमेठी का है जहां सरकारी राशन की दुकान चलाने वाली महिला की मौत के बाद प्रशासन ने लाइसेंस विवाहित बेटी के नाम ट्रांसफर करने से इंकार कर दिया था।
मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट ने अपने फैसले में इस तथ्य की अनदेखी की कि शादी के बाद भी बेटी उसी गांव में रहते हुए काम में अपनी मां की मदद और अपनी दिव्यांग बहनों की देख रेख करती थी। मां की मौत के बाद याचिकाकर्ता ही अपनी बहनों की देख भाल कर रही है, जिसमें एक दृष्टिबाधित भी है। ऐसे में सिर्फ शादीशुदा होने के चलते उसे अनुकंपा के तहत लाइसेंस से महरूम नहीं किया जा सकता है।