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प्रशासन का बड़ा फैसला: किसानों को बिना एग्रीस्टेक के मिलेगा पर्याप्त खाद

धमतरी जिले में खरीफ सीजन के मद्देनजर जिला प्रशासन ने किसानों के हित में एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि अब किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए एग्रीस्टेक पंजीयन की कोई अनिवार्यता नहीं होगी। वितरण व्यवस्था को बेहद सरल और सुगम बनाते हुए जिले की सभी 96 प्राथमिक कृषि साख समितियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप समय पर खाद उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की असुविधा न होने पाए।
     
ज्ञात हो कि जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके सहित विभिन्न प्रकार के उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। वर्तमान में जिले में कुल 20 हजार 740 मीट्रिक टन खाद का अग्रिम भंडारण किया गया था, जिसमें से अब तक 7 हजार 599 मीट्रिक टन खाद का उठाव किसानों द्वारा किया जा चुका है। वर्तमान में जिले की समितियों में लगभग 17 हजार 141 मीट्रिक टन खाद का बंपर स्टॉक सुरक्षित है और मांग के अनुरूप लगातार इसका पारदर्शी वितरण किया जा रहा है। मार्कफेड एवं सहकारी समितियों के माध्यम से खाद की इस सतत आपूर्ति की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
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जिला प्रशासन द्वारा इस बार पारंपरिक खेती के स्थान पर आधुनिक कृषि तकनीकों को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। कलेक्टर ने किसानों से अपील की है कि वे समय और लागत बचाने के लिए नैनो यूरिया एवं ड्रोन तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करें। वर्तमान में कई साख समितियों में ड्रोन सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से नैनो यूरिया का छिड़काव कम समय में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। आर्थिक रूप से बेहद लाभकारी 225 रुपये में उपलब्ध 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल पारंपरिक यूरिया की एक पूरी बोरी के बराबर पोषक तत्व प्रदान करती है, जो पर्यावरण के अनुकूल भी है।
     
आधुनिक तकनीक को लेकर जिले के किसानों ने भी अपने बेहद सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं। धमतरी विकासखंड के लोहरसी ग्राम के किसान श्री हरिराज सिन्हा और श्री योगेश कुमार साहू पिछले दो वर्षों से नैनो यूरिया का सफल उपयोग कर रहे हैं। श्री सिन्हा ने बताया कि पहले उर्वरक के परिवहन एवं छिड़काव में दो से तीन दिन का समय लगता था, जबकि ड्रोन तकनीक से यह कार्य अब कुछ ही घंटों में पूरा हो जाता है, जिससे खेती की लागत में लगभग 20 प्रतिशत की सीधी बचत हो रही है। इसी तरह कुरूद क्षेत्र के किसान श्री देवेंद्र, मगरलोड के श्री मोहन और धमतरी की महिला किसान श्रीमती संगीता साहू ने बताया कि नैनो यूरिया और ड्रोन के प्रयोग से मजदूरों की समस्या दूर हुई है, खाद की मात्रा कम लगी है और फसल की बढ़वार तथा उत्पादन पर इसका बहुत शानदार प्रभाव देखने को मिला है।
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खाद वितरण व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग द्वारा सभी उर्वरकों का वितरण अनिवार्य रूप से पॉस (PoS) मशीन के माध्यम से किया जा रहा है। इससे प्रत्येक किसान को उसकी जोत (जमीन) के आकार के अनुसार अनुशंसित मात्रा में ही खाद उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अधिक कीमत पर बिक्री को सख्ती से रोकने के लिए कृषि विभाग के विशेष उड़नदस्ता दलों द्वारा सहकारी समितियों तथा निजी विक्रेताओं के ठिकानों का लगातार औचक निरीक्षण किया जा रहा है।
     
जिला प्रशासन ने किसानों से विशेष अपील की है कि वे खाद की खरीदी केवल अधिकृत सहकारी समितियों अथवा लाइसेंसी विक्रेताओं से ही करें। कृषि विभाग ने सचेत किया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने या तय दर से अधिक कीमत वसूले जाने की स्थिति में किसान तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष के दूरभाष क्रमांक 07722-232249 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रशासन का मुख्य प्रयास यही है कि इस खरीफ सीजन में किसी भी किसान को परेशानी न हो और समय पर पर्याप्त खाद-बीज उपलब्ध कराकर जिले में खरीफ फसलों का रकबा और कुल उत्पादन बढ़ाया जा सके।
3377/विष्णु


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त्रिवेन्द्र जगत

त्रिवेन्द्र जगत एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और cgsandesh.com के लेखक हैं। स्नातक की डिग्री और पत्रकारिता में 7+ वर्षों के अनुभव के साथ, वे पाठकों के लिए शिक्षा, करियर, करंट अफेयर्स और सरकारी योजनाओं से जुड़ी हर छोटी-बड़ी और महत्वपूर्ण खबर लेकर आते हैं। सही, सटीक और समय पर जानकारी देना ही उनका मुख्य लक्ष्य है।
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