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स्मार्ट कार्ड से आयुष्मान कार्ड में नाम जुड़वाने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में लग रही है भीड़

सरायपाली. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत बनाए जा रहे ई-कार्ड में नाम जुड़वाने के लिए इन दिनों सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में काफी भीड़ उमड़ रही है. अस्पताल खुलते ही परिवार के छूटे सदस्यों का नाम जुड़वाने के लिए आधार कार्ड लेकर सपरिवार कार्ड धारी अस्पताल पहुँच रहे हैं. प्रतिदिन सदस्यों का नाम जुड़वाने के लिए 30 से 50 लोग अस्पताल में देखे जा सकते हैं.

मिली जानकारी अनुसार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत नाम जुड़वाने के लिए मुखिया का स्मार्ट कार्ड एवं सदस्यों का आधार कार्ड व फोटो अनिवार्य है. स्मार्ट कार्ड से आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए पूर्व में केवल पीड़ित मरीज का ही आधार कार्ड एवं फोटो मंगवाया जाता था और आयुष्मान कार्ड बनाया जाता था. 

लेकिन विगत दिनों शासन के निर्देश पर सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में स्मार्ट कार्ड से आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. जिनका नाम स्मार्ट कार्ड में नहीं है वे भी मुखिया के आयुष्मान कार्ड बनवाने के बाद स्वयं के नाम का आयुष्मान कार्ड मुखिया के नंबर से प्राप्त कर सकते हैं.

स्मार्ट कार्ड में नाम होने की जानकारी भी अधिकांश लोगों को नहीं है. जब वे इलाज के लिए अस्पताल पहुँचकर कार्ड जनरेट करवाते हैं तब उन्हें पता चलता है कि उनका नाम स्मार्ट कार्ड में दर्ज नहीं है. जानकारी होने के बाद लोग स्मार्ट कार्ड से आयुष्मान कार्ड बनवाने अस्पताल पहुँच रहे हैं.

कुछ हितग्राहियों ने बताया कि गाँव-गाँव में स्मार्ट कार्ड में नाम जुड़वाने का कार्य समय-समय पर शिविर लगाकर किया गया था, लेकिन उक्त शिविर में नाम जोड़ने का कार्य नहीं हुआ, बल्कि केवल पैसे ऐंठने का ही कार्य हुआ है. प्रति व्यक्ति स्मार्ट कार्ड में नाम जुड़वाने के लिए 30 रू लिया जाता था, लेकिन दो-दो बार नाम जुड़वाने के बाद भी स्मार्ट कार्ड में नाम नहीं जुड़ा है. समय रहते जानकारी न होने के कारण फर्जी शिविर का भांडाफोड़ नहीं हो पाया. इसके कारण आज नाम जुड़वाने के लिए दर-दर की ठोकर खानी पड़ रही है.

5 लाख रूपये तक का करवा सकते हैं इलाज

आयुष्मान कार्ड से पात्र परिवार पूर्ण बीमा अवधि के दौरान कभी भी 5 लाख रूपये तक के इलाज का लाभ प्राप्त कर सकते हैं. पात्र परिवार इलाज की आवश्यकता होने पर कभी भी किसी भी पंजीकृत शासकीय या निजी चिकित्सालय में पदस्थ आयुष्मान मित्र के सहयोग से केवायसी करवा कर आयुष्मान भारत का ई-कार्ड प्राप्त कर सकते हैं एवं योजना के दिशा-निर्देशानुसार इलाज का लाभ ले सकते हैं.

इस संबंध में बीएमओ श्री कोसरिया ने बताया कि स्मार्ट कार्ड से आयुष्मान कार्ड में बदलने का कार्य शासकीय अस्पताल के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी चल रहा है. एक ही आयुष्मान मित्र होने के कारण अस्पताल में काफी भीड़ हो रही है. भीड़ को देखते हुए एक और आयुष्मान मित्र की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

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