महासमुंद : सावरकर पर प्रश्न पूछने के कारण निलंबित शिक्षक गुरु प्रसाद के समर्थन में उतरा शिक्षक संघ
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के देशव्यापी आह्वान पर आज छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के प्रांतीय एवं जिला पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री (भारत सरकार), माननीय राज्यपाल (केरल) एवं माननीय मुख्यमंत्री (केरल) के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन केरल के शिक्षक गुरु प्रसाद के तत्काल एवं अविलंब निलंबन वापसी तथा शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता की रक्षा के संबंध में दिया गया।
ज्ञापन के माध्यम से संघ ने स्पष्ट किया कि वीर सावरकर पर प्रश्न पूछना कोई अपराध नहीं है। शिक्षक पर की गई निलंबन की यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों और अकादमिक गरिमा पर सीधा कुठाराघात है। शिक्षा क्षेत्र को वैचारिक पूर्वाग्रहों और राजनीतिक दबावों से पूरी तरह मुक्त रखा जाना चाहिए।
ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख मांगें:-
निलंबन की अविलंब वापसी: शिक्षक गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
निष्पक्ष न्यायिक जांच: इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं न्यायिक जांच सुनिश्चित की जाए।
अकादमिक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: देशभर के शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और गरिमा की सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
राजनीतिक दबाव से मुक्ति: शैक्षणिक व्यवस्था को राजनीतिक हस्तक्षेप और वैचारिक पूर्वाग्रहों से मुक्त रखा जाए।
प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति:
ज्ञापन सौंपने के दौरान छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष उमेश भारती गोस्वामी, उप प्रांताध्यक्ष टेकराम सेन, जिला अध्यक्ष अनिल पटेल , जिला सचिव जयराम पटेल , जिला संगठन मंत्री भागवत राम जगत , डी बसंत साव, अभिनंदन नाग, किरण कन्नौजे, लक्ष्मीकांत सिन्हा सहित बड़ी संख्या में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रांतीय प्रतिनिधि और शिक्षकगण उपस्थित रहे।
संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों के सम्मान, स्वाभिमान और अधिकारों का दमन करने की कोशिश की गई, तो शिक्षक समुदाय इसके खिलाफ अपनी आवाज और बुलंद करेगा।
जयराम पटेल, जिला सचिव छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ जिला महासमुंद (संबद्ध: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ)