झीरम घाटी कांड पर फैसला टला, अब 5 सितंबर को होगा निर्णय - CG Sandesh

झीरम घाटी कांड पर फैसला टला, अब 5 सितंबर को होगा निर्णय

रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में एनआईए कोर्ट के फैसले का इंतजार अब पांच दिन और बढ़ गया है। सोमवार 31 अगस्त को आने वाला फैसला अब 5 सितंबर तक टाल दिया गया है। इस मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला था, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। अब शेष 10 आरोपियों के संबंध में अदालत का फैसला आना है।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, जबकि बड़ी संख्या में दस्तावेजी साक्ष्य भी अदालत के सामने पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित होने का दावा किया है, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती देते हुए अपनी दलीलें रखी हैं।

25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला

झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के तहत सुकमा क्षेत्र में कार्यक्रम और रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला दरभा के रास्ते जगदलपुर लौट रहा था। काफिले में करीब 25 वाहन और लगभग 200 नेता-कार्यकर्ता शामिल थे।

काफिले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और कवासी लखमा समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद थे। झीरम घाटी में नक्सलियों ने घात लगाकर काफिले पर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।

भूपेश बघेल ने NIA जांच पर उठाए सवाल

झीरम घाटी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA की जांच को सतही और अधूरा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दरभा थाने में दर्ज मूल FIR और उसमें नामजद लोगों से ठीक से पूछताछ नहीं की गई। साथ ही घटना के चश्मदीदों के बयान दर्ज नहीं किए गए।

बघेल ने इसे आपराधिक-राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए आरोप लगाया कि षड्यंत्र के पहलू की जांच नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के निर्देश के बावजूद आंध्र प्रदेश में सरेंडर कर चुके नक्सली नेता गुड़सा उसेंडी से बयान नहीं लिया गया।

झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े नक्सली हमलों में शामिल है। घटना के करीब 13 साल बाद अब NIA कोर्ट में चले ट्रायल के बाद फैसले की तारीख तय हुई है। ऐसे में 5 सितंबर को आने वाले फैसले पर बस्तर से लेकर पूरे छत्तीसगढ़ की नजरें टिकी हुई हैं।


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