बरगढ़ से रायपुर रेल लाईन निर्माण होने से संबलपुर व सरायपाली का सीधा संपर्क अन्य राज्यो से होगा
छत्तीसगढ़ के पूर्वी क्षेत्र का नगर सरायपाली व बसना विधानसभा व तुमगांव , झलप ,पटेवा क्षेत्र के लगभग 8 लाख नागरिकों को आजादी के बाद के 72 साल बाद भी रेलवे लाइन की सुविधा से वंचित है । नागरिकों , व्यापारियों व उद्योगपति आज भी सड़क मार्ग से ही आवागमन व माल ढुलाई करने मजबूर हैं । सड़क मार्ग की सुविधा के चलते सभी को आर्थिक व समय का बहुत नुकसान हो रहा है । मालभाड़ा अधिक होने से इसका सीधा असर आमनागरिको पर पड़ रहा है । मूल्य वृद्धि का यह भी एक प्रमुख कारण है । रेलवे लाइन के अभाव में इन क्षेत्रों का जिस ढंग से समुचित व समग्र विकास होना था वह नही हो पा रहा है । जिसकी वजह से आर्थिक , सामाजिक , राजनैतिक , औद्योगिक ,रोजगार , माल परिवहन , समय के द्वार खुल नही पा रहे है ।
ओडिशा के पश्चिमी क्षेत्र जिसमे प्रमुख रूप से संबलपुर , बरगढ़ व सोहेला नगर आते हैं सम्बलपुर व बरगढ़ दोनों नगर हालांकि रेलवे लाईन से जुड़े जरूर है पर वे अपने नगर से महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान के साथ ही अन्य राज्यो में सीधे नही जा सकते । इस सुविधा से इस क्षेत्र के लगभग 8 लाख लोग वंचित है । अभी इन्हें इन राज्यो में जाने के लिए झारसुगुड़ा या रायपुर पहले जाना होगा । वहाँ से इन्हें ट्रेन बदलकर जाना होगा जो कि महंगा व काफी तकलीफ व असुविधा जनक है ।
इसी असुविधा व बेहतर कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुवे सम्बलपुर , बरगढ़ ,सोहेला व सरायपाली के साथ ही इस लाइन से लाभान्वित होने वाले लगभग 10 लाख लोग पिछले 50 सालों से रायपुर से तुमगांव , झलप , पटेवा , पिथौरा , सांकरा , बसना , सरायपाली , सोहेला होते हुवे बरगढ़ रेल लाईन की निर्माण किये जाने की मांग लगातार करते आ रहे है । कितनी सरकारे आई व गई पर किसी भी सरकार ने इसे गंभीरता से नही लिया जिसकी वजह से आज भी दोनों क्षेत्र के लगभग 15 लाख लोगों को रेलवे लाईन व बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा से आज तक वंचित हैं ।
काफी मांग किये जाने व आवाज उठाये जाने के बाद भारत सरकार , रेल मंत्रालय व रेलवे बोर्ड द्वारा इसे जरूरी समझते हुवे व गंभीरता से लेते हुवे सन 2012 में इस रेलवे लाईन के निर्माण के लिए सर्वे सूची में शामिल किया । रेल मंत्रालय के रेलवे बोर्ड द्वारा पत्र क्रं. 2012 /w – i /Genrl./Sarveys / Budjet/ दिनांक 19 / 07 /2012 के तहत एक आदेश जारी किया गया था जिसमे सर्वे क्रमांक 13 में रायपुर से बरगढ़ व्हाया तुमगांव , झलप , पटेवा ,पिथौरा , बसना , सोहेला से बरगढ़ को शामिल किया गया था । इस 184 किलोमीटर लंबे रेलवे लाईन हेतु रेलवे बोर्ड द्वारा 27.6 लाख रुपये की स्वीकृति भी ढ़ी गई थी । किन्तु इसके बाद इस सर्वे आदेश का सर्वे रिपोर्ट क्या आया व 7 वर्षो बाद भी रेल्वे लाईन का निर्माण क्यों नही हो सका इसकी कोई अधिकृत जानकारी रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नही किये जाने से वास्तविकता से क्षेत्रवासी अनभिज्ञ है । और न ही 15 वर्षो तक लगातार छत्तीसगढ़ व केंद्र में भाजपा की सरकार रहने के बावजूद इस ओर किसी ने ध्यान भी नही दिया । वैसे इस रेलवे लाईन के सर्वे आदेश की जानकारी क्षेत्र के अधिकांश लोगों को है भी नही इसी वजह सर भी किसी का ध्यान इस ओर गया भी नही । वर्तमान में सरायपाली में भारतीय खाद्य निगम , नान का गोदाम भी है । क्षेत्र में काफी संख्या में राइस मिल है , भारतीय खनिज विभाग द्वारा कई बार सर्वे भी कराया गया था जिसकी रिपोर्ट सकारात्मक होने के कारण उसने वाले समय मे खनिजो के परिवहन में भी आसानी होगी । एफ सी आई व नान का चावल अभी सड़क मार्ग से जाने से परिवहन लागत में काफी पैसे निकलने की जानकारी मिली है । कुछ वर्षों पूर्व सेना का बेस केम्प का भी सर्वे हुवा था पर बताया जा रहा है कि रेलवे लाइन के अभाव में सड़क मार्ग से उन्हें काफी खर्च होने के अनुमान के कारण यह मामला भी खटाई में पड़ गया । रेलवे लाइन निर्माण से सेना के बेसकेम्प के भी आरंभ हो जाने की संभावना बढ़ जाएगी ।
इस संबंध में रेल उपभोक्ता संघ बरगढ़ व रायपुर बरगढ़ रेल निर्माण संघर्ष समिति सरायपाली द्वारा एक ज्ञापन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी , रेल मंत्री पीयूष गोयल तथा क्षेत्र के सांसदों व विधायको को दिया जा रहा है जिसमे बताया जा रहा है कि यह रेल लाइन दोनों क्षेत्र के राजनैतिक , आर्थिक , सामाजिक , औद्योगिक , समय , ईंधन , रोजगार , सुलभ व सस्ता परिवहन ,तकनीकी व सर्वांगीण विकास के लिए क्यों जरूरी है ।
अभी वर्तमान में (1)सम्बलपुर – झारसुगुड़ा से रायपुर की दूरी 361 किलोमीटर (2) सम्बलपुर – टिटलागढ़ से रायपुर की दूरी 385 किलोमीटर है । बरगढ़ व सम्बलपुर वालो को रायपुर जाना हो तो क्रमशः 361 व 385 किलोमीटर की थकावट , उबाऊ व आर्थिक नुकसान के साथ दूरी तय करनी पड़ती है । और यदि बरगढ़ से रायपुर सीधे रेलवे लाईन का निर्माण होने से यह दूरी घटकर सीधे सम्बलपुर से 227 व बरगढ़ से मात्र 180 किलोमीटर हो जाती है । तो वही इस नई रेल्वे लाईन निर्माण से मुम्बई व कोलकाता के बीच की दूरी लगभग 150 से 200 किलोमीटर कम हो जाएगी । वही सम्बलपुर , झारसुगुड़ा , बरगढ़ व सोहेला व सरायपाली सहित इस लाइन में पड़ने वाले अन्य नगरों को सीधी रेल सेवा भी उपलब्ध हो जाएगी जिससे लगभग 15 लाख लोग सीधे लाभान्वित होंगे । वही इस रेलवे लाइन निर्माण से इन क्षेत्रों का सीधा संपर्क महाराष्ट्र , राजस्थान , गुजरात सहित अन्य कई प्रदेशों व शहरों से सीधे जुड़ जाएंगे । इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है की रेल मंत्रालय के लिए रायपुर से बरगढ़ रेल लाइन निर्माण क्यो जरूरी है ।