नतीजे घोषित होने के दो माह बाद भी नहीं आई अंकसूची, अंकसूची के अभाव में आगे की पढ़ाई हो सकती है प्रभावित
सरायपाली. पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय द्वारा पुनर्मूल्यांकन, पुनर्गणना एवं पूरक परीक्षा के नतीजे घोषित करने के दो माह बाद भी परीक्षार्थियों को अंकसूची प्राप्त नहीं हुई है. कई बार विद्यार्थी अंकसूची के लिए स्थानीय महाविद्यालयों का चक्कर लगा चुके हैं.
आनलाईन परीक्षा फॉर्म के लिए विश्वविद्यालय द्वारा ही अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए अंकसूची की भी आवश्यकता पड़ेगी. आन लाईन फॉर्म की हार्ड कॉपी जमा करने तक अंकसूची न आने की स्थिति में नेट कॉपी से ही उन्हें काम चलाना पड़ेगा.
अभी तक कुछ ही कक्षाओं की अंकसूची महाविद्यालय में पहुँची हैं. पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के अंतर्गत सरायपाली में 3 महाविद्यालय संचालित हैं, जिसमें स्व. राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय, डॉ भीमराव अम्बेडकर महाविद्यालय बलौदा, रामचण्डी महाविद्यालय बगईजोर शामिल हैं. तीनों महाविद्यालयों से सैकड़ों विद्यार्थियों ने पुनर्गणना, पुनर्मूल्यांकन एवं पूरक के लिए आवेदन किए थे. विगत अक्टूबर माह में इसके परिणाम घोषित हो चुके हैं. जिसमें से अनेक विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम भी बदला है. वहीं कई विद्यार्थी पूरक से उत्तीर्ण एवं अनुत्तीर्ण से पूरक भी आये हैं.
पूरक की पात्रता रखने वाले विद्यार्थियों ने पूरक परीक्षा भी दिया है. कई विद्यार्थी पूरक परीक्षा हेतु आन लाईन आवेदन के अंतिम तिथि तक पुनर्गणना के नतीजे नहीं आने के कारण पूरक के लिए भी फॉर्म भर दिए थे. पुनर्गणना में पूरक से उत्तीर्ण होने के बाद आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को न तो राशि वापस मिली है और न ही उन्हें नतीजों की अंकसूची प्राप्त हुई है.
विश्वविद्यालय के द्वारा विलंब में पुनर्गणना के नतीजे घोषित करने के कारण कई विद्यार्थियों का पैसा पूरक फार्म भरने में चला गया है, जिसे उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है. वहीं पूरक के पात्र विद्यार्थी भी अक्टूबर में ही पूरक की परीक्षा दे चुके हैं, लेकिन आज तक उन्हें अंकसूची प्राप्त नहीं हो पायी है. मात्र बीए अंतिम और बी कॉम के अंकसूची ही अभी तक महाविद्यालय में पहुँचे हैं.
जबकि अन्य कक्षाओं की अंकसूची अब तक नहीं पहुँच पाये हैं. आगामी 23 दिसंबर से आन लाईन परीक्षा फॉर्म भरने का कार्य भी प्रारंभ हो जाएगा, जो 7 जनवरी तक बिना विलंब शुल्क के लिया जाएगा. ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को बिना अंकसूची के परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और उनकी आगे की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है.