मध्यान्ह भोजन योजना से 85 हजार 311 छात्र-छत्राएं लाभान्वित
मध्यान्ह भोजन योजना शासन की महती योजना है, इस योजना में 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने, बच्चों की शाला के प्रति आकर्षण बढ़ाने, बच्चों की दाखिला में वृद्धि करने, शाला में उनकी उपस्थिति में वृद्धि करने एवं शाला में ठहराव सुनिश्चत करने के उद्देश्य से मध्याह्न भोजन प्रारंभ की गई। जिले में 1596 प्राथमिक एवं 615 माध्यमिक शालायें संचालित है, जहां अध्ययनरत 85311 छात्र-छात्राएं इस योजना से लाभान्वित हो रहे है।
मध्यान्ह भोजन योजना अंतर्गत प्राथमिक तथा माध्यमिक शाला के बच्चों को चांवल 100 ग्राम एवं 150 ग्राम तथा कुकिंग कास्ट दाल, सब्जी, एलपीजी इत्यादि सहित 5 रूपये 10 पैसे एवं 7 रूपये 1 पैसे प्रति छात्र के मान से प्रदाय किया जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की चार चिन्हारी नरवा, गरवा, घुरूवा अऊ बाड़ी योजना के तहत् जिले के प्राथमिक तथा माध्यमिक शालाओं में किचन गार्डन के माध्यम से जैविक खाद का उपयोग कर सब्जी उगाई जा रही है, जिसका उपयोग भी मध्यान्ह भोजन में किया जा रहा है। बच्चों में कुपोषण तथा प्रोटीन की कमी को दूर करने जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) से सप्ताह में एक दिन प्रति छात्र 20 ग्राम की मान से दूध पावडर प्रदान किया जा रहा है, जिसका उपयोग मीठी खीर बनाने में किया जाता है। जिले के 2,029 मध्यान्ह भोजन संचालनकर्ता स्व-सहायता समूह से जुड़े 3,435 रसोईयों द्वारा गुणवत्तायुक्त पका हुआ भोजन प्रदाय किया जा रहा है।