लोगों में नहीं रहा कोरोना का भय, सोशल डिस्टेंसिग और मास्क पहनने के नियमों को उड़ रही धज्जियाँ, सरकार दे रही ढील, लगातार बढ़ रहे आंकड़े.....
कोरोना का भय अब लोगों में नही दिख रहा है, लोग अब कोरोना के साथ जीने को अपना भाग्य मान चुके है. अब कोरोना के साथ ही हमें जीना होगा जब यह बात सरकार ने भी कह दिया तो लोग भी इसके पूरी तरह से ख़त्म होने की उम्मीद छोड़ चुके है. सबकी सोच बन चुकी है कि सरकार कितनी ही कोशिश कर ले कोरोना उन तक पहुंच कर ही रहेगा. लोगों ने अब अपनी भविष्य की चिंता भी करनी छोड़ दी है, जो जिस काम मे लगा बस वही कर रहा है, अब लोगों में कुछ नया कर गुजरने का वह उत्साह ही नही रहा है, ना जाने कब कौन इस बीमारी की चपेट में आ जाएं.
भारत के हालात अब ऐसे हो चुके है कि दिल्ली जैसे महानगगरों में अस्पतालों में मरीजों को रखने की जगह धीरे-धीरे ख़त्म होती जा रही है. लगातार संक्रमण के आंकड़ों के साथ मौत का भी आंकड़ा बढ़ता चला जा रहा है.
कोरोना में किये जाने वाले रिसर्च भी कुछ दिल को तसल्ली देते है तो कुछ बहोत ही भयानक होते है, लेकिन इस बीच भी लोग सरकार से सोशल मीडिया में उम्मीद लगाए दिखते है और छत्तीसगढ़ की जनता उन 13 लोगों को एक अखबार के माध्यम से ढूंढती है जिन्होंने कभी छत्तीसगढ़ में कोरोना को फैलने से पहले ही रोक दिया था.
जब छत्तीसगढ़ की सरकार ने पहले ही कोरोना को फैलने से रोक दिया था तो फिर कहाँ से आ रहे अचानक इतने मरीज ? अब तो कोरोना के नए मरीजों के मिलने का आंकड़ा भी सैकड़ों में होता जा रहा है, जहां पहले केवल बाहर से आये लोगों की वजह से कोरोना फैल रहा था तो अब स्थानीय स्तर गांव तक मे भी कोरोना का संक्रमण फैल चुका है.
जब लॉक डाउन में प्रवासी मजदूर लगातार उनके घरों की तरफ भागने लगे थे, तो इसमें राजनीति के कई रंग देखने को मिले, पार्टी कोई भी रही हो जो सत्ता में रहे वो मजदूरों के वापस आने पर पाबंधी लगाए तो विपक्ष ने सत्ता पक्ष को लगातार घेरते हुए उन्हें तुरंत अपने घरों तक पहुंचाने की मांग करते रहे.
इसके बाद घर वापस आये कई लोगों की जांच सही समय पर नही हुए, कुछ क्वारेन्टीन सेंटर में नही रहे. तो महासमुंद जिले में कुछ लोगों के क्वारेन्टीन सेंटर से घर पहुंचने के बाद कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आई. महासमुन्द जिले में क्वारेन्टीन सेंटर में रह रहे लोगों से मिलने उनके परिवार वालों और कई स्थानीय लोग आये जिनके ऊपर एफ.आई.आर दर्ज की गई है. ऐसे सब देखकर यह कह पाना मुश्किल है कि आप और हम कितने सुरक्षित है.
धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ में अब सभी तरह के लॉकडाउन हटाये जा रहे है, राज्य शासन के आदेश के बाद राज्य में दुकाने सुबह 5 से रात्रि नौ बजे तक खोली जा सकेंगी.
लोग सरकार द्वारा बनाये गए नियमों के पालन में लगातार अनदेखी कर रहे है, महासमुंद जिले के महासमुंद सहित बसना, सरायपाली और पिथौरा में न तो होटलों में, न ढेलों में, न चौपाटी में और न ही दुकानों में सोशल डिस्टेंसिग का पालन हो रहा है. कई दुकानों में सेनेटाजर का उपयोग भी नहीं हो रहा है. लोग मास्क भी नहीं लगा रहे है और बेवजह घूम रहे है.
इसके
बावजूद राज्य शासन द्वारा लगातार नियमो में ढील दी जा रही है, तो वहीं महासमुंद
जिले के सरायपाली ने राज्य शासन के नियम के अनुसार रात 9 बजे तक नहीं बल्कि कोरोना
संक्रमण को देखते हुए शाम 7 बजे तक ही दुकाने खोलने का निर्णय ले चुकी है. इस नियम
के साथ सप्ताह में एक दिन गुरूवार को सरायपाली की सभी दुकानें बंद भी रहेंगी. नही तो 5 हजार जुर्माना किया जायेगा. हालाकि सोशल
डिस्टेंसिग और मास्क पहनने को लेकर बनाये गए नियम का आज भी लोग पालन करते नहीं
दिखे. लेकिन सरायपाली के इस फैसले से लोगों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या
राज्य सरकार लॉकडाउन में जो ढील दे रही है वो जल्दबाजी तो नहीं है.