सर्पदंश से 2 की मृत्यु, एक झाड़ फुक करने वाले बैगा के चक्कर मे पड़ा था तो एक झोला छाप डॉक्टर के.
सांकरा और झलप मे 2 अलग अलग घटनाओ में सर्प दंश से 2 व्यक्तियों की मौत होने की खबर है. मिली जानकारी के अनुसार सर्प दंश के बाद इनमें से 1 झोला छाप डाक्टर तो दूसरा बैगा के चक्कर मे पड़ गया था.
पहली घटना सांकरा क्षेत्र के ग्राम परसवानी में विधुत सब स्टेशन में हुई, जहां पदस्थ किशनपुर निवासी प्रकाश प्रधान उम्र 25 वर्ष बीती रात ड्यूटी पर थे तो वहीं उन्हे सांप ने डस लिया.
जानकारी मिली है कि सांप डसने के बाद वह स्वयं बाइक चलाते हुए धरमपुर के एक बैगा के पास गया था जहाँ से उन्हें गंभीर हालात में पिथौरा लाया गया. और शासकीय अस्पताल के डाक्टरो ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
वही दूसरी घटना जिले के झलप फरफौद में ग्राम पंचायत ढांक के आश्रीत ग्राम तेलीबांधा निवासी बेदराम यादव बीती रात अपने घर मे परिवार के साथ सोई थी तभी रात करीब 1 बजे जहरीले सर्प ने उन्हें डस लिया इसकी जानकारी होने पर परिवार वाले उसे निजी वाहन से अपना घर ले आए, जहां एक खुद के डॉक्टर बताने वाले एक व्यक्ति के घर मे रात भर इलाज के नाम पर रखा गया.
इस बीच उनकी तबियत बहुत बिगड़ गई जिसके बाद उसे सरकारी अस्पताल पिथौरा ले जाया गया तो डाक्टरो ने उसे मृत घोषित कर दिया. वही शव का पोस्टमार्टम कर परिजनो को सौप दिया गया.
जानकारी के अभाव में कहे, या लोग जानबूझ कर अंजान बन बैठते है ? हालात गंभीर होने के बाद भी अस्पताल नहीं पहुँचते है. ज्ञात हो कि जहरीले सर्प दंश के बाद अगर सीधे अस्पताल गए होते तो शायद इनकी जान बचाया जा सकती थी.
लेकिन जानकारी के अभाव कहे या जागरूकता की कमी सर्पदंश के बाद लापरवाही के कारण भी कई लोगो की मृत्यु हो जाती है.
जानिए सर्पदंश की वैक्सीन स्नैक इंजेक्शन के बारे में
सांप के डसने पर उसके उपचार के लिए एंटीवेनम बायोप्रोडक्ट का उपयोग किया जाता है. एंटीवेनम मूलत: सांप या स्पाइडर का ही जहर होता है. इसे पहले एकत्रित किया जाता है. इसके बाद उसे ब्लक में डाल्यूट कर घोड़े, भेड़ या बकरी के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है. जानवरों का इम्यून सिस्टम एंटीबाडीज मॉलूक्यूल्स तैयार करता है. जानवरों के खून से एक्टिव मॉलूक्यूल्स को हार्वेस्ट कर एंटीवेनम बनाई जाती है. जिसका उपयोग सर्पदंश पर किया जाता है.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एंटीवेनम स्नैक इंजेक्शन का इस्तेमाल करने के लिए डॉक्टरों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है. सांप काटने के बाद पीड़ित के बयान अनुसार इंजेक्शन दवाई का डोज दिया जाता है. कम उम्र के सांप कांटने, बड़े उम्र के सांप काटने, की स्थिति में अलग-अलग डोज की इंजेक्शन लगाया जाता है.