कलेक्टर की अध्यक्षता में समय-सीमा की बैठक, शत-प्रतिशत गिरदाव... - CG Sandesh

कलेक्टर की अध्यक्षता में समय-सीमा की बैठक, शत-प्रतिशत गिरदावरी कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश.

किसानों के पंजीयन कार्य भी तय समय पर करें

खरीफ के लिए गिरदावरी का कार्य प्रारम्भ हो गया है। इस कार्य को हर हालत में सितम्बर अन्त से पहले पूरा कर लिया जाये। हल्का पटवारी मौके पर वास्तविक रूप से गिरदावरी का कार्य करें साथ ही यह ध्यान रखें कि भू-स्वामी के नाम में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं हो। मुख्यमंत्री द्वारा गिरदावरी कार्य को अत्यन्त गंभीरता से लिया जा रहा है। शत्-प्रतिशत गिरदावरी कार्य सुनिश्चित किया जाए। उक्त बातें कलेक्टर  कार्तिकेया गोयल  ने समय-सीमा की बैठक में कही। उन्होंने समर्थन मूल्य पर धान-मक्का खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन काम भी तय समय पर करने को कहा। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डाॅ. रवि मित्तल, अपर कलेक्टर  जोगेन्द्र नायक, सहित महासमुंद सहित सरायपाली, बागबाहरा, पिथौरा के अनुविभागीय अधिकारी-राजस्व सहित ब्लाक स्तरीय अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए।

कलेक्टर  कार्तिकेया गोयल ने स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र आवेदन की आॅनलाईन एन्ट्री की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्ति की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि हर सप्ताह कम से कम 500 आवेदन की आॅन लाइन एन्ट्री होनी चाहिए। ताकि पात्र बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाये जा सके। कलेक्टर  गोयल ने कहा कि कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए आगामी दिनों में गणेशोत्सव आयोजन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने जिले के सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारी एवं नगरपालिका अधिकारियों को दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही आयोजन की व्यवस्था सुनिश्चिित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मूर्ति की चैड़ाई और ऊंचाई 4ग4 अधिक न हो। मूर्ति विसर्जन हेतु जारी निर्देशों का भी पालन किया कराया जाये। उन्होंने मुख्यमंत्री जन चैपाल, कलेक्टर जन चैपाल और जन शिकायत (पीजीएन) में प्राप्त आॅन लाइन आवेदन के निराकरण की भी जानकारी ली।  

उन्होंने विभिन्न पेंशन योजना हितग्राहियों के आधार सीडिंग के लिए जरूरी हो तो तय कार्यक्रम आयोजित कर पेंशनधारियों की आधार सीडिंग करायी जाये। कलेक्टर ने बारी-बारी से अधिकारियों से लंबित प्रकरण के निराकरण की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि समय-सीमा के प्रकरणों में हम सब की जवाबदारी तब तक बनी रहेगी। जब तक प्रकरण का निराकरण नहीं हो जाता। इसलिए प्रकरणों का परीक्षण कर समय पर निराकरण सुनिश्चिित किया जाये। 

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