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छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ की मांग : सुरक्षा के लिए शीघ्र किये जाएँ उपाय, जाति प्रमाण पत्र बनाने पालक संपर्क की बाध्यता पर लगे विराम.

छत्तीसगढ़ में अब लोगों को घर बैठे ही जाति और निवास प्रमाण पत्र मिलने लगा है. जिससे बार-बार अब लोगों को लोक सेवा केंद्रों और तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहें है. कोरोना संकट, भीड़ और बार-बार के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में यह लागू कर दिया गया है. छात्र-छात्राओं को घर बैठे जाति प्रमाण पत्र मिलने खुश नजर आ रहें है.  

तो वहीँ कोरोना महामारी के गहराते संकट के इस दौर में छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ द्वारा अपना कर्तव्य निभाने वाले अधिकारी व कर्मचारियों की समुचित सुरक्षा व बीमा करने तथा शिक्षकों द्वारा पालक संपर्क कर जाति प्रमाण पत्र बनाने की बाध्यता को वर्तमान में तत्काल स्थगित रखने की मांग लगातार की जा रही है.

तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ का कहना है कि शासन-प्रशासन द्वारा अब तक इस पर सार्थक पहल नहीं की गई है, जिसके कारण कोरोना से संक्रमित होने वाले अधिकारी व कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है तथा कई कार्यालयों को कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ रहा है.

संघ के संरक्षक प्रमोद तिवारी व अध्यक्ष ओम नारायण शर्मा ने कहा है कि कोरोना काल में कार्यं करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए संगठन द्वारा लगातार सुरक्षा की मांग करने के बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा गंभीरता नहीं दिखाना घोर निराशा का विषय है.

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ द्वारा 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कोरोना में काम करने वाले सभी संवर्ग के अधिकारियों व कर्मचारियों के सुरक्षा व बीमा की मांग की गई थी तथा 28 अगस्त को पुनः मुख्यमंत्री के नाम से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कोरोना मरीजों कें इलाज एवं देखभाल में प्रत्यक्ष, परोक्ष लगे शासकीय सेवकों को विशेष ‘‘कोरोना भत्ता‘‘ सहित कार्यरत कर्मचारियों को पूर्ण सुरक्षा तथा मृतकों को विशेष पैकेज व जिले में वर्तमान में जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को लक्ष्य देकर घर-घर जाकर पालकों से संपर्क कर अभिलेख संकलित करने की बाध्यता को तत्काल स्थगित करने की मांग की गई थी. परन्तु अब तक इन मांगों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है.

उन्होंने बताया कि विभागीय दबाव के चलते कर्मचारी कांट्रेक्ट ट्रेसिंग करने व जाति प्रमाण पत्र बनवाने जैसे संवेदनशील कार्य के लिए घरों में जाकर लोगों के संपर्क में आ रहे हैं जिससे कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है. वर्तमान में स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जिले में इस कार्य को तत्काल स्थगित कर अधिकारियों व कर्मचारियों के हित में उन्हें सुरक्षा प्रदान किये जाने की मांग की गई है.

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