राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम (क्लाइमेट चेंज) में मददगार साबित हो सकती नरवा, गरवा, घुरवा की सीख
जहां, संयुक्त राष्ट्र संघ प्रदूषण को मानव स्वास्थ्य के
लिए सबसे बड़ा पर्यावरणीय जोखिम और वैश्विक स्तर कई बीमारी का कारण मानता
है। वहीं, इन दिनों कोविड-19 की वैश्विक महामारी ने समूचे विश्व को झकझोर
कर रख दिया है। जिसे देख अधिकांश बड़ी शक्तियां प्राकृतिक विपदाओं से बचाव
की ओर तवज्जों देने के लिए सिरे से पहल करते नजर आ रही हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग ने भी राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम
(क्लाइमेट चेंज) के तहत आमूल-चूल सकारात्मक परिणाम पाने का लक्ष्य
निर्धारित किया है और क्रियान्वयन गति को तेजी से बढ़ाया जा रहा है। प्राप्त
जानकारी के अनुसार जिला स्तर पर लोगों में प्रदूषण के दुष्प्रभाव बतलाकर
प्रकृति के प्रति कर्तव्यों की मानसिकता को सही दिशा देने के लिए नोडल
अधिकारी के रूप में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक
श्री संदीप ताम्रकार को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तारतम्य शनिवार को
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में एक वृहदत्तर आॅनलाइन
प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों एवं मितानिन
सहायकों को उक्त संबंध में किए जाने वाले क्रियान्वयन के लिए प्रेरित किया
गया। प्रशिक्षण में वायु, जल एवं भूमि प्रदूषण के कारकों और दृष्प्रभावों
पर अद्यतन जानकारी दी गई। साथ ही अधिकाधिक लोगों को इस दिशा में जागरूक
करने की ओर लक्षित किया गया। क्लाइमेट जोन के नोडल अधिकारी श्री ताम्रकार
ने बताया कि अब तक जिले में मुख्यालय एवं विकासखण्ड स्तर पर ऑनलाइन
प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अगले क्रम में जमीनी स्तर पर गांव-गांव,
गली-मोहल्लों तक प्रदूषणरोधी जागरूकता प्रयास शुरू कर दिए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रशिक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि हाल ही में सरकार
द्वारा शुरू किए गए ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा, गरवा, घुरवा बारी की योजना से
इस ओर काफी समन्वय मिल सकता है। प्रकृति से जुड़ी इस महत्वकांक्षी
योजनांतर्गत बुहुतेरे अधिकारी-कर्मचारी और गणमान्य नागरिकों के सहयोग से
अच्छा प्रतिफल मिल रहा है, जो कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए सकारात्मक
क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में काफी मददगार साबित हो सकता है।
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