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बसना शासकीय शराब दुकान में फिर से बेचीं गई एक्सपायरी बीयर, पत्रकार देशराज ने पुलिस में की शिकायत.

बसना शासकीय शराब दुकान में एक्सपायरी बीयर बेचे जाने की शिकायत अब बसना के पत्रकार देशराज दास ने पुलिस से की है. पत्रकार देशराज दास ने कल बसना शराब दुकान में एक्सपायरी बीयर बेचे जाने के सुचना पर पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने शराब दुकान से बीयर ख़रीदा तो उसमे समाप्ति तिथी 19 मई 2020 का था. इसके बाद जब उन्होंने  शराब दुकान के कर्मचारी से इस बारें में पूछा तो उन्होंने पत्रकार को अनेक प्रकार का प्रलोभन दिया और मामले को दबाने का प्रयास किया. लेकिन उन्होंने इसका खुलाशा करने के लिए बसना के अन्य पत्रकार, पुलिस और आबकारी विभाग के पुलिस को बुलाया.

जहाँ पुलिस और पत्रकार तो पहुंचे लेकिन जो जिम्मेदार थे कार्यवाही कर सकते थे आबकारी विभाग के वह अधिकारी नहीं पहुंचे. मामले में जिला आबकारी अधिकारी ने आबकारी विभाग के अधिकारी को भेजकर कार्यवाही करने की बात कही लेकिन आबकारी विभाग से कोई नहीं आया.

इधर पुलिस अधिकारीयों ने यह कहते हुए कार्यवाही करने से मन कर दिया कि शराब दुकान आबकारी विभाग के अंतर्गत आता है इसलिए वे कार्यवाही नहीं कर सकते. मौके पर जब पुलिस अधिकारी पहुंचे तो शराब दुकान के कर्मचारियों ने अपना शटर गिरा दिया था, शायद उन्हें पता था कि नियम के अनुसार पुलिस को भी उस कक्ष के अन्दर घुसने के लिए अनुमति लेनी होगी. पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन बिना कार्यवाही के वापस लौट गई.

वहीं शराब दुकान के कर्मचारी मामला उजागर होने के बाद एक्सपायरी बीयर बेचना बंद कर दिए, और शटर बंद कर  काउंटर से शराब बेचते रहे. जिसे देखकर यह स्पष्ट हो गया कि क्यों शराब दुकान से छत्तीसगढ़ के स्थानीय लोगों को हटाकर बाहरी लोगों को रखा गया है.

बाहरी लोगों के शराब दुकान सम्हालते ही शहर में ओवररेट और कमीशन पर अवैध शराब बेचने की भी चर्चाएँ होने लगी है.

गौरतलब है कि पूर्व में शराब दुकान से निकाले गए कर्मचारी ने शिकायत की है कि आबकारी विभाग और प्लेसमेंट कंपनी द्वारा लगातार कई वर्षों से शासकीय शराब दुकान में कार्य कर रहे कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है. और समाप्ति तिथि की बीयर नहीं बेचने पर उन्हें काम से निकाल दिया गया है.

इससे पहले भी सरायपाली शराब दुकान के कर्मचारियों से अवैध वसूली की मांग को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक इसकी शिकायत ही थी. 15 जुलाई 2020 को अवैध वसूली तथा दुसरे राज्यों के कर्मचारियों को काम में रखने की शिकायत उच्चस्तर पर की थी. जिसमे कर्मचारियों ने बताया था कि एरिया मैनेजर हर माह उनसे 15 से 20 हजार रुपये की मांग करता है जिसे नहीं देने पर काम से निकालने और ट्रांसफर करने की धमकी देता है. इसके आलावा वहां कई ऐसे कर्मचारी है जो लगातार बिना वेतन के काम करते है और वेतन के लिए उन्हें झूठी दिलशा दिया जाता है. और ज्यादा कुछ बोलने पर काम से निकालने की धमकी दे दी जाती है.


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