स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव के आस्वासन पर एन एच एम कर्मचरियो ने 9 दिन हड़ताल जारी के बाद स्थगन किया।
रामगोपाल खुंटे जिला अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश एन एच एम कर्मचारी संघ के आह्वान में 13000 से अधिक स्वास्थ्य विभाग के अनियमित कर्मचारियों द्वारा नियमिति करण एवं 62 साल की जॉब सुरक्षा को लेकर पूरे छत्तीसगढ़ में प्रदेश ब्यापी हड़ताल पर थे। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के पहले उन्होंने जन घोषणा पत्र में नियमिति करण का वादा किये थे। सरकार 2 साल बीत जाने पर सरकार अनदेखा किया है। कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग के हर कर्मचारी जान को जोखिम में डाल बिना सुरक्षा के काम मे डटे है। हड़ताल 9 दिन चला है । सरकार की कान खड़े हो गये है।
स्वास्थ्य ब्यवस्था चरमरा गये है। मुख्य मंत्री भूपेश बघेल जी और स्वास्थ्य मंत्री बाबा टी एस सिंह देव को पत्राचार किया गया है । एंव एन एच एम स्वास्थ्य संचालक डॉ प्रियंका शुक्ला को भी पत्राचार किया गया है। किसी भी प्रकार से कोई भी प्रतिक्रिया नही हुई है। सिर्फ शासन प्रशासन धोखा दे रहा है। बल्कि नियमिति करन करने के बजाए दण्डात्मक कार्य वाही किये है। जिससे कर्मचारियों के ऊपर डर की भावना समाया हुआ था। फिर भी परवाह किये बिना हड़ताल में डटे थे।मा. स्वास्थ्य मंत्री के जिद में अड़े थे कि हड़ताल खत्म करने के बाद मै अनियमित कर्मचारियो के मांग पर विचार करूँगा। उनसे पुनः निवेदन किया कि मांगे पूरी कर दीजिये तब हड़ताल वापस काम पर जाएंगे।
महासमुंद जिला 24 सितम्बर को हड़ताल वापसी कलेक्टर महासमुंद के वादा पर किया गया बर्खास्त हुए कर्मचारियो को वापस लेने को कहा गया लेकिन उन तीनों कर्मचारियों आज दिनाँक तक जोइनिंग नही हुआ दर दर भटकना पड़ रहा है। सीएमएचओ कार्यलय के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा परेशान करने में लगे है। स्वास्थ्य मंत्री के अनुशंसा पर 27 सितम्बर को हड़ताल शून्य किया गया। बर्खास्त हुई कर्मचारियो को वापस किया जाएगा। हड़ताल अवधि में वेतन की भुगतान किया जाएगा यह स्वास्थ्य विभाग के कोर कमिटी को सौंपा गया। लेकिन लिखित में नही दिया। जिसके कारण किसी भी कर्मचारियों को उनके मुख्यालय में जोइनिंग नही दिया। बर्खास्त कर्मचारियों को कार्यलय में घुसने तक नही दिया। एन एच एम संचालक के पास बैठे दिन बीत गया लेकिन उन्होंने लिखित में जोइनिग और कार्य वाही शून्य की जानकारी नही दिया जिसके कारण एन एच एम कर्मचारियों द्वारा परेशानी का सामना करना पड़ा। न नही इसके सम्बन्ध में जिले के कलेक्टर और सीएमएचओ को किसी भी प्रकार के जानकारी प्राप्त हुआ है।
हर बार अनियमित कर्मचारियों को लाली पाप दिखा कर हड़ताल वापस लेना पड़ता है। यह अनियमित कर्मचारियों का यह हक है इसे शासन प्रशासन को मानना पड़ेगा। यह 13000 अनियमित कर्मचारियों के परिवार का सवाल है। 2.50 करोड जनता को झूठे वादे देकर मुकरना ठीक नही है। अभी आगे समय 2 साल 6 माह बाकी है। ऐसे स्थिति रहा तो हाथ से जा सकता है। अभी समय सोचने समझने विचार करने का है।