मरीज और उनके परिजनों के साथ चिकित्सकों ने मिल कर मनाया विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर भ्रांतियां दूर करते हुए एक-दूसरे के अनुभव बांटे गए पीड़ितों के परिजनों ने बताया कि नियमित उपचार से उनके मरीजों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार दिखने लगा है। साथ ही मनोविकार ग्रस्त लोगों से दूर भागने की बजाय, उन्हें उचित उपचार दिलाने की ओर पहल करते रहने का संदेश दिया“
सदियों तक विडम्बना बनी रही कि मानसिक विकारों से ग्रस्त
मरीजों को परम्परागत क्रम में उपेक्षा का दंश झेलना पड़ता रहा। लेकिन विगत
कुछ वर्षों से जागरूकता बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आज समाज एक बड़ा तबका
मनोविकार को भी अन्य मर्जों की तरह तवज्जो देने लगा है। हर साल की तरह इस
बार भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए शनिवार 10
अक्टूबर 2020 जब जिला चिकित्सालय के स्पर्श क्लीनिक में मरीज और उनके
परिजनों के साथ सोशल डिस्टिेनसिंग में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया
गया।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. आर.के. परदल ने
कहा कि यहां सोचने वाली बात यह है कि मनोविकार की मूल जड़ तनाव और
परेशानियां हैं और ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है ।जिसके जीवन में ये दोनों
समस्याएं कभी न आईं हों। लेकिन, सभी तो मनोरोगी नहीं हो जाते। यहां ध्यान
देने वाली बात यह है कि जागरूक लोग मनोविकार को पनपने नहीं देते और यदि
दिक्कत आ भी जाए तो वे बिना संकोच इन्हें दूर करने के प्रयास में लग जाते
हैं। इसमें चिकित्सकीय परामर्श और स्वस्थ पारिवारिक माहौल दोनों की भूमिका
अहम होती है। इसलिए अब भी जिन लोगों के जहन में मनोविकार को लेकर
भ्रांतियां बनी हुईं हैं उन्हें दूर करना बेहद जरूरी है। ताकि मनोरोगों से
पीड़ित सभी मरीजों को स्वास्थ्य लाभ की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके।
इस
क्रम में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डाॅ.
छत्रपाल चंद्राकर ने बताया कि मनोविकारों को लोग अक्सर छिपाते हैं और
अवसाद धीरे-धीरे बढ़ कर मनोरोग में तब्दील हो जाता है। इसके बाद भी कुछ लोग
लापरवाही करते हैं और उपचार नहीं कराते। जिससे कभी-कभी कुछ मरीज आक्रामक हो
जाते हैं तो कुछ अत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं। यहां, जरूरत है कि
हम मनोविकार के लक्षण जैसे मरीज का अचानक से अलग वर्ताव करने लगना, आहार
लेना बहुत कम या बंद कर देना, हमेशा चिडचिडा या गुमसुम रहना, नकारात्मक
बातें करना या बोल-चाल ही बंद कर देना आदि को पहचानें और मरीज के साथ शांति
एवं सहानुभूति से पेश आएं। उपचार संबंधी बिन्दुओं पर प्रकाश डालते हुए
मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि स्पर्श क्लीनिक में प्रत्येक
शुक्रवार और शनिवार को दोपहर दो बजे के बाद शाम छह बजे तक मनोविकार से
ग्रस्त मरीजों को निशुल्क परामर्श, उपचार एवं दवा वितरण के लिए सेवाएं
उपलब्ध कराई जाती हैं। वर्तमान में यहां कुल 385 पंजीबद्ध मरीज उपचाररत
हैं। इसके साथ ही विगत तीन वर्षों में सभी विकासखण्ड स्तर के फाॅलोअप
मरीजों के आंकड़े मिला कर कुल तकरीबन सात हजार से भी अधिक बार परामर्श
प्रदान किया जा चुका है।
बेटे के लिए ब्रेन टाॅनिक लेने पहुंचे पिता ने कहा अब काफी ठीक है
शहर
के एक स्थानीय निवासी अपने 24 वर्षीय पुत्र के लिए ब्रेन टाॅनिक लेने
पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि पहले उनका पुत्र कभी गुमसुम बैठा रहता तो कभी
अपने आप से ही बातें करने लगता था। वे पिछले 6 महीने पहले ही उपाचर के लिए
उसे स्पर्श क्लीनिक ला रहे हैं और आज उसके स्वास्थ्य में सुधार है। बस
याददाश्त थोड़ी कमजोर सी लगती है तो इसके लिए वे ब्रेन टाॅनिक लेने पहुंचे
हैं।
इंजीनियर ने कहा कि बुरा समय गुजरा, अब टेन्शन नहीं लेता
कभी
अपने रोजगार तो कभी अन्य समस्याओं को लेकर अत्यधिक तनावगस्त रहने वाले शहर
के एक युवा इंजीनियर भी फाॅलोअप लेने स्पर्श क्लीनिक पहुंचे थे। उन्होंने
बताया कि कुछ मरीज तो बिना दवा लिए ही ठीक हो जाते हैं, उनके लिए सलाहकार
का मश्वरा ही दवा का काम कर जाता है। हमें चाहिए कि हम मनोविकार को पनपने
ही न दें, जरूरत हो तो बिना हिच-किचाए चिकित्सकों की मदद लें। इससे
स्वास्थ्य लाभ जल्द मिल जाता है।
गांव भ्रमण कर उपचार करवा रही मितानिन रूकमणी
बम्हनी
क्षेत्र की मितानिन रूकमणी गांव-गांव भ्रमण करती है। उसने मनोविकार लक्षण
पहचानने और अत्महत्या रोकथाम अभियान नवजीवन का प्रशिक्षण भी ले रखा है।
बताती हैं कि मनोविकार की कोई आयु, वर्ग या जाति-धर्म नहीं होता। आमतौर पर
जब तनाव होता है और हम उसका प्रबंधन नहीं कर पाते हैं तो यह मनोरोग का रूप
धारण कर लेता है। मैं लोगों को प्रेरित करती हूं कि वे मनोविकारों को न
छिपाएं और जब उनके नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रों में भी उपचार उपलब्ध है तो
कही और क्यों जाएं।
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पीजी पोर्टल में शिकायत के बाद भी नहीं मिल रहा न्याय, जाँच प्रणाली में सुधार की आवश्यकता, आजादी के 79 साल बाद भी शिकायत के जाँच में स्वतंत्रता नही.
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