विकास से कोसो दूर है बसना ब्लॉक का यह इलाका, मरीजो के लिए नही पहुंचती एम्बुलेंस, नाहने के लिये भी भटकते है ग्रामीण
बसना ब्लॉक के ग्राम पंचायत करनापाली के एक छोटा सा मोहल्ला सेल्सरोवर वार्ड नंबर 7 जो गांव से बीहड़ इकालो जैसा दिखता है. यकीन तो हमे भी नही हुआ की उस मोहल्ले में एम्बुलेंस नही पहुँचती बरसात के दिनों में आना जाना पुरी तरह बन्द रहता है.
लेकिन करनापाली ग्राम पंचायत में सेल्सरोवर नाम से एक मोहल्ला है जिसमे लगभग 30 से 40 गरीब परिवार जीवन यापन कर रहे है, जो विकास से कोसो दूर इस मोहल्ले में पहुचने के लिए पगडंडी मार्ग का उपयोग करते है.
इस मार्ग पर सिर्फ 2 पहिया वाहन ही चल सकता है. वह भी सिर्फ गर्मी के मौसम में ही. बरसात के मौसम में करनापाली से यह मार्ग पूरी तरह कीचड़ मय रहता है. मोहल्ले के एक जहग खेत और नाले से होकर गुजरना पड़ता है. आज तक वहां पुलिया नही बनाया गया है.
मोहल्ले वासियों को आना-जाना करने के पहले एक भारी ऊंचा रास्ते को चढ़ना पड़ता है जो पूरी तरह चट्टानों को तोड़कर ग्रामीणों द्वारा बनाया गया है. जिसमे भारी सावधानी के साथ ही 2 पहिया वाहन और सायकल को चढ़ाया जा सकता है. और जरा से भी लापरवाही आपको सीधा 100 फिट निचे गिरा सकता है.
ग्राम पंचायत करनापाली ये सेल्सरोवर वार्ड नम्बर 7 मोहल्ला के रहवासियों को मुख्यमार्ग तक आने जाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. बताया गया कि मोहल्ले वासियों को ज्यादा तकलीफ उस समय होता है जब कोई मरीज को अस्पताल ले जाना रहता है और एम्बुलेंस नही पहुँच पाती है. ऐसे में जचकी के समय महिलाओं को खाट से उठाकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है तब जाकर मरीज के बचता है.
मोहल्ले वासियों के लिए नही है तालाब, नाले में नहाने मजबूर
मोहल्ले वासियों ने बताया कि इस मोहल्ले के लिए तालाब भी नही है, ग्रामीणों द्वारा एक नाले में बरसात के बाद एक गड्ढे नुमा जगह ने पानी जाम रहता है उसी में नहाते है. जो गर्मी से पहले ही सुख जाता है. जिसके बाद मोहल्ले वासियों को इधर-उधर नहाने के लिए भटकना पड़ता है.
मोहल्ले वासियों के साथ पँचायत का सौतेला व्यवहार
ग्राम पंचायत द्वारा अपने गांव करनापाली के सड़को में कई स्ट्रीट लाइट लगाया गया है, लेकिन इस पिछड़े हुए इलाके में एक भी स्ट्रीट लाइट नही लगाया गया. बता दें कि यह मोहल्ला डोंगरी पहाड़ नुमा जगह में हैं. ऐसे में जंगली जानवरों और जहरीले जंतु से आमना-सामना होता रहता है. वहीं रात को 7 बजते ही पहाड़ के निचे घनघोर अंधेरा में जीवन यापन करना मजबूरी हो गया है.
मोहल्ले वासियों ने चर्चा के दौरान बताया कि गाँव मे कम से कम पहुँच मार्ग को तो सुगम बना दिया जाए, पिछले कई कार्यकालों से सरपँच सचिवों को मोहल्ले वासियों द्वारा माँग किया जा रहा है लेकिन हमारे लिए सड़क एक सपना बन कर रहा गया है.