फर्जीवाड़ा को अंजाम देने के बाद गठजोड़ में शामिल रहे विभागीय लोग अब एक-एक कर अपना तबादला अन्यत्र करवाते जा रहे है - लोकेश चन्द्राकर
अंचल में हाथी उत्पात की आड़ लेकर सामान्य वन मंडल महासमुन्द के जिम्मेदार अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ से भ्रष्टाचार का बेमिसाल कीर्तिमान गढ़ दिया है। वर्ष 2019 - 20 में फसल क्षति पूर्ति राशि वितरण के नाम पर जिस कदर सरकारी पैसों का बंदरबांट किया है उसका दूसरा कोई उदाहरण नही है। खास बात यह है कि,फर्जीवाड़ा को अंजाम देने के बाद गठजोड़ में शामिल रहे विभागीय लोग अब एक-एक कर अपना तबादला अन्यत्र करवाते जा रहे है।
वनमंडलाधिकारी मयंक पांडेय द्वारा भी अपना बोरिया बिस्तर समेट जिला बालोद में पदभार ग्रहण कर लिए है। साथ ही महासमुन्द में नये वनमंडलाधिकारी पंकज राजपूत ने अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है। समझा जा रहा है कि, उप वनमंडलाधिकारी शिव शंकर नाविक भी आने वाले कुछ दिनों में तबादले पर अन्यत्र चले जायेंगे। सहायक वन परिक्षेत्राधिकारी ज्ञानचंद कश्यप मामले के खुलासे पूर्व ही स्थानान्तरण पर चले गये है। अलबत्ता मंडल कार्यालय में पदस्थ मुख्य लिपिक मनमोहन सिंह गौर पदोन्नति पर भी महासमुन्द छोड़ने से मना कर चुके है। संभवतः उन्हें खुद के न रहने से करोड़ों के फर्जीवाड़ा का साफ उजागर होने का डर सता रहा है।
ज्ञातव्य है कि,हाथी प्रभावित महासमुन्द परिक्षेत्र में वर्ष 2019-20 की फसल क्षति पूर्ति राशि का वितरण ऐसे लोगों को भी किया गया है जिसके नाम संबंधित हल्के में एक इंच भी कृषि भूमि नही है। इसी प्रकार फसल क्षति का आंकलन और मूल्यांकन करने में भी मनमानी करते हुये जिन्हें हजारों का मुआवजा दिया जाना था उन्हें लाखों रुपयों का भुगतान कर दिया गया है। परिवार में एक व्यक्ति के नाम पर ही जमीन होने के बाद भी पूरे परिवार के लोगों के नाम पर अनेक प्रकरण बनाकर भुगतान दिखा दिया गया है।
बलि का बकरा बनी छोटी मछली
बीते सदी में घटित कोडार मुआवजा कांड से भी बड़े वन विभाग के मुआवजा कांड का भांडा बीते जुलाई माह में जैसे ही फूटा महकमे में हड़कंप मच गया । मामले को ठंडा करने के इरादे से विभाग की महिला वन रक्षक रूपा चतुर्वेदी को निलंबित करने की कार्यवाही आनन-फानन में कर दी गई । उस पर अपने परिजनों को लाभ पहुंचाने तथा शासकीय कार्यो में अनियमितता बरते जाने का आरोप थोप दिया गया । फिलहाल रूपा चतुर्वेदी विभाग के बागबाहरा कार्यालय में संलग्न है । वस्तुतः मुआवजा का निर्धारण और वितरण में स्वयं डी.एफ़.ओ.,एस.डी.ओ.,रेंजर पटवारी तथा मंडल कार्यालय के मुख्य लिपिक की अहम व बड़ी जिम्मेदारी थी और यह सभी लोग अभी तक कार्यवाही की आंच से खुद को महफूज रखे हुये है।
जनपद सदस्य प्रतिनिधि एवं समाज सेवी लोकेश चन्द्राकर ने वनमंडल के मुआवजा कांड को लेकर कहा है कि, दशकों पूर्व कोडार बांध के बनने पर मुआवजा भुगतान में गड़बड़ी का मामला दशकों तक चर्चा में रहा और अब हाथी से फसल क्षति पर मुआवजा भुगतान में 10 गुना से भी बड़ा ( करोड़ों का ) फर्जीवाड़ा हो गया । मामला उजागर होने पर मामूली कार्यवाही फिर सम्बंधित दस्तावेजों की कथित चोरी, जांच की नौटंकी का अब तक परिणाम न निकलना और विशेष रूप से मुआवजा कांड में आकंठ संलिप्त जिम्मेदार लोगों का एक-एक कर अन्यत्र तबादला करवाते जाना साफ - साबित करता है कि,कुछ भी ठीक नही है। बल्कि मामले को ही कफन-दफन करने की दिशा पर काम हो रहा है। यह वाक्या मोहम्मद अकबर जैसे नेता के अधीनस्थ विभाग के दामन पर बदनुमा धब्बे जैसा है। अंत मे उन्होंने कहा कि,वर्ष 2019-20 में हाथी से फसल क्षति के मुआवजा भुगतान मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच के साथ दोषिजनो पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।
लोकेश चन्द्राकर
जनपद सदस्य प्रतिनिधि एवं समाज सेवी ,महासमुन्द