महासमुंद जिले के 30 धान उपार्जन केंद्रों में हुए शार्टेज एवं... - CG Sandesh

महासमुंद जिले के 30 धान उपार्जन केंद्रों में हुए शार्टेज एवं कार्यवाही शून्य विषय पर विधानसभा सत्र में मुद्दा उठाने की मांग.

महासमुंद जिले के 30 धान खरीदी केन्द्र और उपार्जन केंद्रों में भारी शार्टेज आने के बाद भी जाँच कार्यवाही और वसूली नही किया गया. जिससे राज्य सरकार को करोड़ो का आर्थिक नुकसान पहुँचा है.

बता दें कि इन 30 धान खरीदी केंद्रों के साथ कई और अन्य धान खरीदी केंद्रों में भी शार्टेज आया था, लेकिन उन समिति के प्रभारियों द्वारा रिकभरी भर कर जीरो शार्टेज किया गया है.

महासमुंद जिले में 30 धान उपार्जन केंद्रों में धान की शार्टेज को लेकर बसना ब्लॉक कांग्रेस कमेटी धर्मेंद्र नायक ने शिकायत कर कार्यवाही की मांग की गयी थी.  धर्मेंद्र नायक ने शिकायत करते हुए बताया कि महासमुंद ज़िले में सत्र 2019-20 में 127 धान ख़रीदी केंद्रो में 30 ऐसे धान खरीदी केंद्र है, जहाँ धान की कमी बताई गई है. जिसके कारण छत्तीसगढ़ सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और बाकी जगह जीरो शार्टेज आया है.

मामले में कार्यवाही हेतु पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, सहकारिता मंत्री प्रेमसाय टेकाम, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, महासमुंद कलेक्टर, जिला खाद्य अधिकारी महासमुंद को प्रतिलिपि भेजा चुका है. लेकिन अब तक उक्त मामले में कार्यवाही नही होने की वजह से सरायपाली के हेमंत वैष्णव ने पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव, पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के नाम पत्र भेजकर महासमुंद जिले के 30 धान उपार्जन केंद्रों में हुए शॉर्टज, एवं कार्यवाही शून्य विषय पर विधानसभा सत्र में मुद्दा उठाने की मांग की है.

आपको बता दे कि शिकायत पर पिरदा में भी धान के अफरा तफरी के मामले में कार्यवाही किया गया है, जिसमे केंद्र प्रभारी और अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज भी कर लिया गया था, लेकिन अन्य उपार्जन केन्द्रों में कार्यवाही नही होने की वजह से जिम्मेदारों के हौसले बुलंद हो रहे हैं.

इन 30 सोसायटी के उपार्जन केन्द्र में सबसे ज्यादा बसना ब्लॉक के खरीदी केन्द्र है में कमी पाई गई है लगभग 15 उपार्जन केंद्रों में शार्टेज पाया गया है. कांग्रेस ब्लॉक कमेटी बसना के उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र नायक का कहना है कि पिरदा से भी ज्यादा अन्य उपार्जन केंद्रों में कमी पाया गया है. लेकिन शिकायत के बावजूद भी उन 30 धान उपार्जन केंद्रो में कार्यवाही और वसूली क्यों नही किया जा रहा जिसके कारण राज्य सरकार को कई करोड रुपयों का आर्थिक नुकसान हो रहा है.


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