गौधन को गोठानो में नही दिया जा रहा घुसने, साग सब्जियों के स्वार्थ में गोठानो में लगा रहता है ताला, गुणवत्ताहीन निर्माण के कारण पानी टंकी से लेकर चबुतरे जर्जर.
छत्तीसगढ़ का सबसे महत्वतकांक्षी नरवा घुरवा बारी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है. गोठान से संबंधित लोगों के स्वार्थ ने पशुओं को ही गोठान में घुसने के लिए रोकने ताला लगाया है.
बसना ब्लाक अंतर्गत छोटेपटनी के गोठान में पशुओं के लिए बनाया गया पानी टंकी जर्जर हो चूका है. उन टंकियों में दरार आ जाने के कारण पानी का रिसाव हो रहा है. ग्राम छोटेपटनी के गोठान में जब छत्तीसगढ़ संदेश के टीम ने दौरा किया तो वहां ताला लगा हुआ पाया.
वहीं गोठान के बाहर गुजर रहे एक किसान निराधान रात्रे से पूछने पर बताया कि मेरे पास 20 नग गाय और बछड़े है, मेरे अन्य साथियों के पास भी 10 नग 15 नग पशु है. लेकिन गोठान से बस गोबर बेचने के अलावा और कुछ भी फायदा नही मिल पा रहा है.
चर्चा के दौरान निराधान रात्रे ने बताया कि जब पशुओं को चरा खिलाकर गोठान में पानी पिलाने के लिए लाते है. तो गोठान में ताला लगा रहता है. बताया कि गोठान समिती द्वारा पशुओं को गोठान के अंदर पानी पिलाने ले जाने के लिए मना किया है. जिसके कारण गौ धन गोठान का मु ताखते गोठान से गुजरते तो है लेकिन पानी कहीं नाला या तालाब में पीते है.
आपको बता दें कि जिस उद्देश्य से गोठान में लाखों खर्च कर पशुओ के लिए पानी टंकी बनाया गया है. और जिन पशुओं को लाभ मिलना चाहिए उस योजना के तहत पात्र पशुओं को योजना के लाभ से वंचित किया जा रहा है.
बताया गया कि अंचल के कई गोठानो में महिला स्व. सहायता और गोठान समितियों द्वारा गोठान के अंदर साग सब्जियां उगाए है. उनका कहना है कि गौधन अगर अगर गोठान में आएंगे तो उनके साग सब्जियां खा जाएंगे इसलिए पशुओं को योजना से वंचित किया जा रहा है.
वहीं चर्चा के दौरान गोठान का चावी लेकर महिला स्व. सहायता समूह के अध्यक्ष का बेटा पहुंचा जिसे पूछने पर की चावी कहाँ से आया तो बताया कि मैं महिला स्व. सहायता समूह के अध्यक्ष का बेटा हूँ. गोठान के बोर के नहाने आया हूँ. जिस योजना से पशुओं को पानी पिलाना और चारा लगाना है, वहां गोठान से सम्बंधित लोग नाहते दिखाई दे रहें है.
समूह के अध्यक्ष के बेटे को जब गोठान का ताला खोला तो हम भी गोठान के अंदर पहुंचे जहाँ गोठान निर्माण किया गया भारी भ्रष्टाचार सामने दिखाई दिया.
गुणवत्ताहीन निर्माण के कारण गोठान के अंदर पशुओं के लिए जो पानी टंकी बनाया गया हैं उन टंकियों में दरार आ चुका है, उन टंकियों में पानी भरने से पानी बह कर निकल जा रहा है.
वहीं पशुओं के लिए बनाए गए पानी टंकियों में पानी के जगह गोबर के अवशेष पड़े हुए है, पशुओं के लिए बनाए गए टंकियों मे गोबर खरीदे गए बोरियों को धोया जाता है, जिन टंकियों में पशुओं को पानी पिलाया जाना है उन टंकियों का उपयोग बोरियों को धोने में लगाया जा रहा है. साथ ही एक टंकी में तो नहाने धोने का कार्य भी किया जाता है.
बताया गया कि गोठान में पशुओ के बैठने के लिए दो तीन नग चबूतरा निर्माण किया जा रहा है. जो अभी पूरी तरह से पूरा भी नही हुआ है. और दरार आ चुके है. दरसल गर्मी या भारी वर्षा से पशुओं को बचने के छोटेपटनी के गोठान में चबूतरा निर्माण किया गया है जिसमे अभी ऊपर छत लगाना बाकी है. और उन चबूतरों में भी दरार आ चुका है.
छोटेपटनी के गोठन से कुछ ही दूर पर एक चारागाह बनाना है, लेकिन अभी तक कुछ भी नही बन पाया है. चारागाह में बस एक बोर खनन कर छोड़ दिया गया है. वहा ना तो घेरा किया जा रहा है और नही चारा लगाया जा रहा है. चारागाह बंजर एवं बीरान पड़ा है.
बसना के कार्यक्रम अधिकारी से चर्चा करने पर बताया कि छोटेपटनी के गोठान में क्या-क्या खराबी है देखवाने कि बात कही. साथ ही कहा कि चारागाह के लिए अभी पूरा रकम नही निकला है, आते ही चारागाह का भी निर्माण करवाया जाएगा.
ग्राम पंचायत छोटेपटनी के सचिव मनोहर बंजारा से संपर्क करनें पर बताया कि पशुओं को गोठानो में क्यो घुसने नही दिया जा रहा है गोठान समिति ही जानेंगे और पानी टंकी और चबूतरा में दरार के बारे में बताया कि भारी बरसात के दिनों में गोठान निर्माण करवाया गया है इसलिऐ दरारे आ गया है. जो एक सप्ताह में सुधरवा दिया जायेगा.
गोठान निर्माण कार्य के तकनिकी सहायक कु आरती नॉग से कई बार सम्पर्क किया गया लेकिन उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया. लोकपाल जितेंद्र साहू से चर्चा करने पर बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य पशुओं को लाभ पहुँचाना है, गोठान में अगर लापरवाही बरता गया है तो जाँच के बाद कार्यवाही किया जाएगा.