पंचायत की उदासीनता लोगों की मनसा और दुर्पयोग ने रोक रखा खुले में शौच मुक्त भारत का अभियान.
केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ग्रामीणों के लिए कई सारी योजनाएं संचालित कर रही है. ताकि लोगो को किसी प्रकार का परेशानियों का सामना ना करना पड़े. और लोगों के रहन सहन में बदलाव लाया जा सके.
इस उद्देश्य से प्रत्येक जगह शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है, प्रत्येक घरों में, सार्वजनिक जगहों में बाजार पड़ाव गांवों में तालाबों और नदी नालों के किनारे भी शौचालय निर्माण कराया गया है. और आगे भी भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा फंड जारी कर जगह जगह शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है. यहां तक कि गांव के गोठानो में भी शौचालय निर्माण कराया गया है.
लेकिन इतने जगहो में भी, शौचालय निर्माण होने के बाद उन शौचालय का उपयोग नही होता है. इसका बड़ा कारण यह भी है कि या तो उन शौचालय का दुर्पयोग होता है, या व्यवस्था ठीक नही रहता है. या तो फिर लोग शौचालय का उपयोग ही नही करना चाहते.
आज हम अलग-अलग जगहो में शौचालय का दुर्पयोग और पंचायत की उदासीनता और लोगो के मनसा बताएंगे.
पहला मामला बसना ब्लॉक अंतर्गत गोठान चिमरकेल का है जहाँ खबर का बहुत ही बड़ा असर हुआ है. दरसल 11 दिसंबर 2020 को सीजी संदेश डॉट कॉम ने चिमरकेल गोठान से संबंधित खबर प्रकाशन के बाद चिमरकेल गोठान में निरीक्षण करनें तकनीकी सहायक पूर्णिमा ठाकुर, बसना मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी प्रेम चंद बंजारे, वरिष्ठ करारोपण अधिकारी संतलाल साहू, अधिकारी कर्मचारी पहुँचे थे जहां अधीकारियो ने चिमरकेल गोठान का निरीक्षण किया और आवश्यक सुधार के दिशा निर्देश दिए गए.
जिसके बाद गोठान के शौचालय को सुधार दिया गया है औऱ जो शौचालय के टैंक का ढक्कन बाहर पड़ा था उसको भी लगा दिया गया है. शौचालय का को भी सुधार दिया गया है. लेकिन इसके साथ ही चिमरकेल के गोठान के शौचालय में सीमेंट को भर दिया गया है और इस प्रकार जिस जगह को शौच के लिए बनाया गया था. उस जगह का दुर्पयोग किया जा रहा है.
दूसरा मामला ग्राम पंचायत मेढापाली का है जहां ग्राम पँचायत भंवन में शौचालय का निर्माण किया गया है. लेकिन शौचालय की स्तिथि बहुत ही खराब है, दरवाजा टूट चूका है, शौचालय जाने वाले रास्ते मे कटीली झाड़ियां और घास उग चुके है. जिसको पंचायत द्वारा और साफ सुथरा भी नही कराया जा रहा है. इस तरह शौचालय अनुपयोगी साबित हो रहा है.
तीसरा मामला गोठान ग्राम ठुठापाली का है, जहाँ शौचालय तो है लेकिन शायद लोगो को शौचालय का उपयोग ही नही करना है, तस्वीर चंद दिनों पहले का है जहां ठुठापाली के गोठान में बोर खनन किया जा रहा था. जिसको देखने गोठान समिति और ग्रामीण पहुँचे हुए थे.
गोठान में प्रसाधन होने के बावजूद भी गोठान के अंदर ही खुले में एक व्यक्ति द्वारा लघुशंका किया जा रहा था. इसका मतलब या भी होता है कि सार्वजिनक जगहो में भी शौचालय और प्रसाधन होते हुए कई लोग उपयोग करते दिखाई नही देते है.
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत स्वछता, खुले में शौच मुक्त और शौचालय के उपयोग के लिए जन जागरूकता अभियान और विज्ञापन के द्वारा लोगो को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है. यहां तक फ़िल्म टॉयलेट जैसे फ़िल्म बनाकर भी लोगो को जागरूक करनें का प्रयास किया गया है. कई जगहों में सुधार भी हो चुका है लेकिन कुछ जगहों में कुछ न कुछ कमी और शौचालय का दुर्पयोग के कारण खुले में शौच मुक्त भारत के सपना को ठेस पहुँचाते हैं.