कोरोना महामारी के बीच बंदिशों में बना क्रिसमस का त्यौहार
भारत में सभी धर्म के त्योहारों को बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसमें क्रिसमस एक ऐसा त्योहार है जिसका ताल्लुकात तो ईसाई धर्म से है लेकिन पूरे विश्वभर में इसे हर प्रकार के लोगों द्वारा मनाया जाता है। ईसाई धर्म के अनुयायियों को लिए क्रिसमस का यह दिन बड़ा दिन इसलिए भी होता है क्योंकि माना जाता है कि इस दिन प्रभु यीशु का जन्म हुआ था।
विश्व भर में धूमधाम से मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्यौहार इस वर्ष बंदिशों में बना। इस कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए बेतेल मेनोनाइट चर्च जगदीशपुर एवं अंचल के गिरजाघरो में सोशल डिस्टेंस, मास्क पहन कर एक दूसरे को दूर से ही क्रिसमस की बधाइयां दिया।
कम दिखी इस साल की त्यौहार में रौनक
महामारी के चलते लोगो ने जागरूक होकर शासन के नियमों का पालन करते दिखे जिस तरह हर साल चर्चो में भीड़ होती थी इस बार नही दिखी। कई परिवार का आमदनी कम हो जाने के कारण इस बार कम खरीदारी किये।
बच्चे एव बुजुर्ग नही आ सके गिरजाघर में
ईसाई समुदाय का दो मुख्य त्यौहार एक क्रिसमस और एक ईस्टर का पर्व होता हैं शासन के नियम के अनुसार बच्चों एवं बुजुर्गों को लोगो से सामाजिक दूरी जरुरीं हैं। जिससे चर्च में बच्चे एव बुजुर्ग के नही आने से काफी भीड़ जो हर वर्ष होता था इस बार नही हो पाया।
गडरियादल ने कम लोगो के साथ इस बार घुमा
बेतेल मेनोनाइट चर्च जगदीशपुर में इस बार गडरिया दल कम लोगो ने घर घर जा कर प्रभु येशु मसीह की जन्मोत्सव के बारे में बताने निकले।