महासमुन्द : मुख्यमंत्री सुपोषण योजना: कलेक्टर जुड़े वीडियों काॅलिंग के जरिए एनीमिक पीड़ित महिलाओं से
कलेक्टर डोमन सिंह ने आज यहां अपने कार्यालय कक्ष से मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के तहत् व्हाट्सएप वीडियों काॅलिंग के जरिए एनीमिक पीड़ित महिलाओं से जुड़े। उन्होंने ग्राम पंचायत बिरकोनी की मेनका सहू और ग्राम पंचायत बड़गांव की श्रीमती गौरी निषाद से बात की। कलेक्टर ने दोनों महिलाओं से उनके गांव के आॅगनबाड़ी केन्द्र गुुणवत्तापूर्ण गरम पौष्टिक भोजन मिलने की ली जानकारी ली। मेनका साहू और गौरी निषाद ने बताया कि उन्हें माह फरवरी से सप्ताह में तीन दिन गरम भोजन दाल, साग-सब्जी और रोटी दी जा रही है। इसके साथ ही गांव के कुपोषित बच्चांे को भी भोजन परोसा जा रहा है। कलेक्टर ने जब पूछा कि उनके गांव के कितने बच्चें और महिलाओं को गरम भोजन मिल रहा है। तो उन्होंने बताया कि गांव की लगभग 12-13 महिलाओं को गरम भोजन मिल रहा हैं। बतादें कि कलेक्टर ने जिला खनिज न्यास निधि से जिले में माह फरवरी से 06 माह से 03 वर्ष तक के कुपोषित बच्चें और चिन्हांकित एनीमिक महिलाओं को आॅगनबाड़ी केन्द्रों में सप्ताह में तीन दिन दिए जा रहें गुुणवत्तापूर्ण गरम पौष्टिक भोजन परोसने के निर्देश दिए थे। यह काम जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मे है। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डाॅ. रवि मित्तल मौजूद थे।
कलेक्टर ने आगे पूछा कि उन्हें अब कैसा महसूस हो रहा है। निषाद ने बताया कि पहले से वे बेहतर महसूस कर रही हैं। उन्हें थकान भी कम होती है। कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। उन्होंने कहा कि इस योजना का मकसद बच्चों में कुपोषण और एनीमिक पीड़ित महिलाओं एनीमिकता दूर करना है। उन्होंने आगे कहा कि वे स्वास्थ्य की भी नियमित जाॅच कराएं और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। कलेक्टर ने कहा कि आज से 60 उम्र से ज्यादा और 45 से 59 उम्र के गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को कोरेाना का टीका लगाया जाना शुरू हुआ है। फिलहाल ये महासमुन्द चिकित्सालय में निःशुल्क और निजी चिकित्सालय आर.एल.सी. मल्टी स्पेसलिस्ट हाॅस्पिटल में शुल्क लेकर लगाया जा रहा है। अपने गांव के पात्र लोगों को इस बारें में बताएं।
कहा कि राज्य शासन की यह महत्वाकांक्षी योजना है। मुख्यमंत्री स्वयं इसकी माॅनिटरिंग करते हैं। इसके साथ ही मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन योजनाओं की गतिविधियों एवं कार्यों पर सतत् निगाह बनाएं हुए है। कलेक्टर डोमन सिंह ने इन सभी लाभान्वित हितग्राहियों से चर्चा करते हुए कहा कि राज्य शासन के द्वारा सभी वर्गों के हितों के लिए अनेक प्रकार के जनकल्याणकारी योजनाएं सचंालित की जा रही है। सभी हितग्राहियों को जागरूक होकर इसका लाभ अवश्य उठाना चाहिए।
कलेक्टर सिंह ने वीडियों काॅलिंग के जरिए जय माॅ सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह की सचिव रूखमणी पाल से गौठान में बनाए गए वर्मी कम्पोस्ट खाद और अब तक हुए विक्रय और उससे प्राप्त राशि के बारें में भी पूछा। श्रीमती रूखमणी पाल ने कलेक्टर को बताया कि उनके समूह में चार सक्रिय महिला सदस्य हैं। रोज घरेलू काम-काज निपटानें के बाद समूह की महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करने का काम करती है। समूह ने अब तक कुल 240 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद का विक्रय किया है। जिससे समूह को एक लाख 57 हजार रूपए का शुद्ध आमदनी हुई है। सभी सक्रिय चार महिला सदस्यों को 25-25 हजार रूपए देकर शेष राशि बैंक खातें में जमा है। कलेक्टर से बातचीत में समूह की बाकि महिलाओं ने बताया कि अब उनकी आर्थिक स्थिति में पहले से बेहतर हुई है। श्री रूपेश्वर यादव ने एक लाख 70 हजार रूपए का गोबर बेचने की बात करते हुए बताया इस राशि से उन्होंने अपने खेत में ट्यूबवेल (बोर खनन) करवाया है। इसके अलावा उन्होंने कुछ राशि से मवेशियों के लिए पैरा की कुट्टी कराई है।
कलेक्टर ने निजी गोबर बेचनें वालें हितग्राही आशीष साहू से भी चर्चा की। आशीष ने बताया कि वे बी.एस.सी. द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत् हैं। इस बीच उन्होंने इस गोधन सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए उन्होंने अब तक लगभग 30 हजार रूपए का गोधन विक्रय किया गया है। बेचे गए गोधन की राशि उनके खातें में समय पर आ गई है। उन्होंने आगे बताया कि वे इस राशि का उपयोग अपनी पढ़ाई-लिखाई एवं खेती-किसानी के कार्य में लगा रहें हैं। अगली बारी में बातचीत के दौरान गांव की पुष्पा बाई यादव ने कहा कि उन्होंनेे भी 55 हजार रूपए का अपनी मवेशियों का गोबर बेचा है। मिली राशि का उन्होंने भी खेती-किसानी के कार्यों में लगाने के अलावा अपनी बचत राशि से एक गाय खरीदनें में उपयोग किया है।इसी तरह कलेक्टर ने गांव के ही श्री गजराज पाल से भी बातचीत की उनसे भी गोधन विक्रय के बारें में जानकारी ली। गजराज पाल ने कलेक्टर को बताया कि उन्होंने 05 हजार 900 रूपए का गोधन विक्रय किए है। जिसकी राशि उनके खातें में जमा हो चुकी है। इस राशि का उपयोग वे खेती किसानी में करेंगे।