बंसुला गाँव में गोधन न्याय योजना गोबर खरीदी केंद्र आज से हुआ शुभारंभ
बंसुला गांव दुनिया की पहली ऐसी जनकल्याणकारी योजना में हुई शामिल. वर्तमान छत्तीसगढ़ शासन के नरुवा घुरवा बारी के बाद जनकल्याणकारी गोधन न्याय योजना गोठान गोबर खरीदी केंद्र का शुभारंभ आज 15 मार्च सुबह 8 बजे बंसुला डीपा के नवनिर्मित रोजगार गारंटी तालाब के बाजू नर्सरी प्लाट के आरक्षित खाली भूमि में ग्राम सरपंच पंच सचिव आम जनता द्वारा किया गया.
आज पहले दिन शुभारंभ में ही 22क्विंटल 16 किग्रा गोबर की खरीदी हो गई। इस कार्यक्रम में सहस कुमार साहू, ब्रजेश साहू, रुपानंद साव, टिकेश्वर साहू, मानव साहू, जदुमणि साव, चंद्रमणि साव, उमेश साव ,जन्मजय साव, शुशील साव, पूरन साव, धनेश साव, दुलामणी सिदार उपस्थित थे।
वर्तमान छत्तीसगढ़ शासन की सरकार ने इस योजना के लिए नारा दिया है- गोधन न्याय योजना बनेगी वरदान, पशुपालकों के चेहरे पर लाएगी मुस्कान.
अब बंसुला पँचायत में गोबर खरीदी केंद्र में 2 रुपये किलो के हिसाब से खरीदी जायेगी
छत्तीसगढ़ सरकार खरीद रही गोबर दो रुपये प्रति किलो, छत्तीसगढ़ में वर्तमान मुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना की शुरुआत की है. इस योजना के तहत पुशपालकों से सरकार गोबर खरीदेगी, जिसका उन्हें भुगतान भी किया जाएगा. मुख्यमंत्री या सरकार ने इस योजना के लिए नारा दिया है, "गोधन न्याय योजना बनेगी वरदान, पशुपालकों के चेहरे पर लाएगी मुस्कान." सरकार का कहना है कि गोबर खरीदने वाली ये दुनिया की पहली ऐसी योजना है.
अब सवाल ये है कि ये योजना पशुपालकों के चेहरों पर मुस्कान कैसे आएगी. छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि गोबर खरीदने से पशुधन के सरंक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा. सरकार का ये भी कहना है कि खेतों में पैरा जलाने पर रोक लगेगी, पर्यावरण प्रदूषण रुकेगा, वर्मी कम्पोस्ट खाद के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा मिलने से खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी, खुले में चराई की प्रथा पर रोक लगेगी, जिससे फसलों की सुरक्षा होगी.
इस योजना के तहत सरकार पशुपालकों से 2 रुपये प्रति किलो गोबर खरीदेगी. सरकार का कहना है कि अगर गौपालक सेंटर में जाकर गोबर नहीं बेचता है तो वह घर से भी बेच सकेगा और किराये का खर्च काटकर उसे भुगतान किया जाएगा.
महासमुंद जिले के ग्राम बंसुला गाँव खरीदी केंद्र में योजना का शुभारंभ करते हुए जन्मजय साव पूर्व जनपद सदस्य वर्तमान सरपंच प्रतिनधि एवमं वर्तमान पंच एवं बंसुला ग्राम पंचायत सचिव ने बताया कि पशुपालकों से खरीदे गए गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाकर इच्छुक किसानों को 8 से 10 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा, इससे किसान आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा. यानी सरकार को गोबर बेचकर किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ेगी, साथ ही उन्हें खेती के लिए बेतहर खाद सस्ते दामों में भी मिलेगा.

बता दें कि किसान आज भी गोबर को एक जगह इकट्ठा कर फसल के वक्त खेतों में डालकर खाद के रूप में इस्तेमाल करता है. ये बहुत ही पारंपरिक तरीका है. लेकिन इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार गोबर खरीदेगी और उससे कम्पोस्ट खाद बनाएगी और फिर किसानों को ही बेचेगी. इससे एक फायदा ये भी होगा कि खेती में यूरिया का उपयोग कम हो जाएगा.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने भी इस योजना के बारे में कई जानकारी साझा की है. सोमवार को उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, ''आज हरेली पर्व के अवसर पर दुर्ग जिले के पाटन में गोधन न्याय योजना का शुभारंभ गोबर क्रय कर किया. पाटन पहुंचने के बाद बैलगाड़ी में सवार होकर गौठान पहुंचकर वहां नागर और गायों की पूजा की.''