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महासमुंद : गवाही के लिए बुलाया और मानसिक अस्वस्थ की करोड़ों की जमीन हथियाने का प्रयास...जानकारी के बाद जताई आपत्ति, आज कलेक्टर से मिलेंगे परिजन

गवाही में हस्ताक्षर करवाने के नाम पर मानसिक तौर पर अस्वस्थ व्यक्ति की तीन एकड़ की जमीन को कूटरचना कर रजिस्ट्री कराने का मामला प्रकाश में आया है। वारिसानों से अकेले रहने का फायदा उठाते हुए मानसिक अस्वस्थ सनातन प्रधान को क्रेता गण जगदीश प्रधान पिता बिरंची, भरत प्रधान पिता बिरंची, नरेश पिता विरंची प्रधान द्वारा पंजीयन कार्यालय ले जाया गया और चेक थमाते हुए जमीन को पंजीयन करा लिया गया। उल्लेखनीय है कि उक्त चेक की राशि भी अब तक विक्रेता के खाते में नही पहुंची है और विक्रेता के वारिसानों को भी जमीन बेचे जाने की कोई जानकारी नही थी।
मिली जानकारी के अनुसार जिले के सरायपाली विकासखंड के ग्राम सरायपाली स्थित भूमि खसरा नंबर 538 रकबा 1.181 हे का विक्रय पंजीयन उप पंजीयक कार्यालय सरायपाली में 21 मार्च उक्त क्रेताओं के नाम पर पंजीयन कराया गया है। जिसका पंजीयन क्रमांक CG5911118032021009 है। वारिसानों को खाली पड़ी जमीन में जेसीबी वगैरह चलने की जानकारी मिली तो इस बाबत जानकारी जुटाने के दौरान इन बातों का खुलासा हुआ। विक्रेता सनातन प्रधान की पत्नि सुकांति प्रधान, पुत्र धर्मेन्द्र प्रधान,

पुत्री सुनीता प्रधान उत्तराधिकारी हैं। इन्होनें तत्काल तहसील कार्यालय में इस बात को लेकर आपत्ति दर्ज कराते हुए पत्र लिखा कि वे अन्यत्र निवास करते हैं तथा सनातन प्रधान ग्राम

सरायपाली पहनं 14 में अपने पैतृक गृह में अकेले रहते हैं। और मानसिक रूप से अस्वस्थ व विक्षिप्त हैं। इस विक्षिप्तता का दुरुपयोग करते हुए क्रेताओं द्वारा षडयंत्र पूर्वक रजिस्ट्री करवाया गया है।
विक्रेता को गवाही में हस्ताक्षर करना है कहकर उसकी जमीन की रजिस्ट्री करवा ली गई है। उन्होने मांग की है कि विक्रेता के मानसिक स्थिति को जानते हुए भी क्रेता के द्वारा उनके अन्य उत्तराधिकारी और वारिसानों से संपर्क किये बिना उनकी जमीन को फर्जी ढंग से रजिस्ट्री कर अपने नाम से प्रमाणीकरण करवाने का प्रयास किया जा रहा है। जो कि गलत एवं विधि विरुद्ध है।
कूटरचना पर एफआईआर की भी मांग सनातन प्रधान के उत्तराधिकारियों ने थाना सरायपाली में दिए गए आवेदन में कूटरचना कर जमीन पंजीयन कराने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उल्लेखनीय है कि उक्त सौदे की न तो उन्हें जानकारी दी गई और न ही विक्रेता को किसी प्रकार का भुगतान किया गया है। केवल उपपंजीयन के समक्ष चेक पकड़ाकर फर्जीवाड़ा करते हुए जमीन का पंजीयन कराया गया है जिसमें तहसील एवं पंजीयन कार्यालय के कर्मचारियों की भी मिलीभगत होने की आशंका है। मामले में उत्तराधिकारियों ने जांच कर दोषियों के खिलाफ अपराध पंजीबध्द किए जाने की मांग की है।
 
मिली जानकारी के अनुसार इस पूरी योजना का मास्टर माइंड तहसील कार्यालय में पदस्थ एक बाबू है। जो क्रेताओं में से एक का पुत्र है। विक्रेता के वारिसानों ने बताया है कि उसी के द्वारा जमीन को हड़पने के लिए साजिश रची गई है। और तहसील कार्यालय में नामांतरण कार्रवाई को गति प्रदान की जारही है। मामले में आपत्ति के बावजूद राजस्व अमले द्वारा नामांतरण की कार्रवाई के लिए संबंधितों को नोटिस भेजा गया है।

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