डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान व्यर्थ नही जाएगा- शंकर अग्रवाल
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश आह्वान पर आज भारतीय जनता पार्टी पिथौरा मंडल द्वारा स्थानीय पुष्प वाटिका में जनसंघ के संस्थापक डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की मूर्ति पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर तथा पुष्पवाटिका तथा मुक्तिधाम में वृक्षारोपण कर बलिदान दिवस के रूप में मनाया गया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पूर्व प्रदेश मंत्री भाजपा छत्तीसगढ़ एवं ज़िला संगठन प्रभारी ज़िला मुंगेली शंकर अग्रवाल ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा की श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत की आधारशिला रखने वाली विभूतियों मे महान देशभक्त शिक्षाविद चिंतक कुशल राजनेता एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अपनी अलग पहचान है। 6 जुलाई सन 1901को बंगाल में आशुतोष मुखर्जी के घर जन्मे शिशु के ग्रह लग्न देख किसी ज्योतिषी ने विश्वास पूर्वक कहा था। सर आशुतोष मुखर्जी आपका यह पुत्र अत्यंत विलक्षण और सौभाग्यशाली है। यह महान देशभक्त युग प्रवर्तक समाजसेवी शिक्षाविद तथा गणितज्ञ होगा। इतिहास साक्षी है की ज्योतिषी की भविष्यवाणी अक्षरस सत्य सिद्ध हुई। 15 वर्ष की आयु में हाई स्कूल शिक्षा प्राप्त करते समय एक निर्धन सहपाठी के परीक्षा शुल्क पटाने की असमर्थता को लेकर प्रधान पाठक से बहस करके शुल्क माफ करना उनके अदम्य सहस एवं परोपकारिता का परिचायक है।
अग्रवाल ने आगे कहा की सन 1936 में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय हुए तथा विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए। बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदुओं पर अमानुषिक अत्याचार देख डॉक्टर मुखर्जी हिंदू महासभा से जुड़ गए। वीर सावरकर की विचारधारा से प्रभावित होकर वे भारतीय पोशाक सिद्धांतों के प्रबल समर्थक हो गए। प्रभावशाली भूमिका के कारण उन्हें हिंदू महासभा के प्रधान के पद पर चुन लिया गया। डॉक्टर मुखर्जी 15 अगस्त सन 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में वाणिज्य मंत्री बने। इस पद पर रहते उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किये पंडित जवाहरलाल नेहरू से वैचारिक मतभेद होने पर उन्होंने अप्रैल 1950 में मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहायता से सन 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की लोकसभा तथा विधानसभा के लिए 742 प्रतिनिधि खड़े किए तथा 33 सदस्य निर्वाचित हुए। डॉक्टर मुखर्जी भारी मतों से लोकसभा सदस्य चुने गए।स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान तथा कश्मीर में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का वे लगातार विरोध करते रहे। इसी के कारण परिणाम स्वरूप उन्हें 1953 में जम्मू कश्मीर सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। जेल उनकी तबीयत खराब हो गई हॉट चार-पांच दिन की बीमारी के बाद 23जून। 1953 की रात्रि उनका देहांत हो गया। अपार संपदा, सुख सुविधा के सभी साधन उपलब्ध होते हुए भी उन्होंने सादगी पूर्ण जीवन बिताया। दया, मानवता, परोपकार, सेवा और सद्भावना से परिपूर्ण संयमित जीवन बिताते हुए आजीवन भौतिक प्रपंच एवं आडंबरो से दूर । ऐसे निष्काम देशभक्त राजनीतिज्ञों कि आज ही देश को आवश्यकता है।ऐसे महान देशभक्त राष्ट्र सेवक जो देश के लिए बलिदान हुए हैं उनकी बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। तथा उनके अधूरे कामों को और बताए हुए मार्ग पर चलकर राष्ट्र निर्माण में हम सब सहभागी बनेंगे।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रीतराम सूर्य,मंडल अध्यक्ष नरेश सिंघल,भाजपा ज़िला मंत्री किरण अग्रवाल,प्रदेश कार्यकारिणी एंजीयो प्रकोष्ठ शशि डडसेना,मंडल महामंत्री आशीष शर्मा,जिलाध्यक्ष अनुसूचित जाति मोर्चा प्रियरंजन कोशरिया,विरेंद्र तिवारी,मन्नु ठाकुर,भाजयुमो प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य विक्की सलुजा,ज़िला महामंत्री दुलिकेशन साहू,पार्षद संतोष डडसेना,ज़िला मंत्री अल्पसंख्यक मोर्चा राजा खनुजा,राजेश चौधरी,युवा मोर्चा महामंत्री द्वय दुर्गेश सिन्हा,सौरभ अग्रवाल,डिगेश प्रधान,मंडल मंत्री प्रतीक बोस,सोमनाथ यादव,योगेश यादव,राहुल सोना,सागर बोस,देव पटेल,रवि वासुदेव,रामप्रशाद बारीक,कृष्णा धुर्व सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्तिथ थे।