बहुचर्चित नान घोटाला में टुटेजा- शुक्ला बने आरोपी...साल 2020 में E.D मामले में हाई कोर्ट से मिली थी जमानत
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाला मामले में दिनांक 30 जून 2021 का दिन अहम रहा। विशेष न्यायालय श्रीमती लीना अग्रवाल के कोर्ट में आरोपी के रूप में नान के मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा एवम शुक्ला को कटघरे में पुरा दिन खड़ा होना पड़ा। ये पूरा प्रयास में लगे रहे कि इनके ऊपर लगे आरोप खारिज हो जाए पर माननीय विशेष न्यायालय की विद्वान न्यायाधीश ने आखिरकार चार्ज अंततः लगा ही दिया। सूत्रों की माने तो एक धारा स्व विवेक से पृथक से न्यायालय के द्वारा लगाया गया। इस प्रकार अब ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है ।
अब देखने वाली बात यह है कि चार्ज शीट न्यायालय में डालने के बाद टुटेजा को छत्तीसगढ़ सरकार निलंबित करती है या नही , जबकि नियमानुसार चार्ज लगने के पश्चात सरकार को दोनों ही आरोपियों को फैसला आने तक कार्य से पृथक करते हुए निलंबित कर देना चाहिए । पर अब देखना यह है कि अब चार्ज फ्रेम हो जाने के बाद सरकार इन्हें निलंबित करती है या की छोटे और बड़े अधिकारी के बीच की विभाजन रेखा कायम रहेगी।शासन के नियमानुसार तत्काल निलंबन की तलवार गिरनी चाहिए।सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार 5 जुलाई 2021 को पुनः इन अधिकारियों को न्यायालय के सामने उपस्थित होना है ।
साल 2020 में E.D मामले में हाई कोर्ट से मिली थी जमानत
आईएएस अनिल टुटेजा और आईएएस डॉ आलोक
शुक्ला ने छत्तीसगढ़ के माननीय उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत का लाभ मिला गया था
माननीय न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल की एकल पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय के
मामले में अधिवक्ता अवी सिंह और अधिवक्ता आयुष भाटिया द्वारा प्रस्तुत
तथ्यों को स्वीकार किया गया था
बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला जनवरी, 2019 को दर्ज किया गया था जो कि एन्टी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा वर्ष 2015 में पंजीकृत अपराध से उत्त्पन्न हुआ है जिसमें नागरिक आपूर्ति निगम के 28 ठिकानों पे छापा मार कर करोड़ो रूपये बरामद किए थे, इस मामले में 28 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसमें अनिल टुटेजा और डॉ आलोक शुक्ला का नाम नहीं था। ऐन चुनाव के पहले करीब ढाई साल बीतने के बाद राज्य सरकार ने पूरक चालान पेश करते हुए दोनों ही अधिकारी के नाम शामिल किए थे।