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महासमुंद : कलेक्टर ने कृषि से जुड़े विभागों के ज़िला स्तरीय अधिकारियों की ली बैठक

राज्य शासन की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी का क्रियान्वयन जिला प्रशासन द्वारा तेजी से किया जा रहा है। ज़िले की गौठान कार्य तेजी से चल रहा है। ज़िले के लगभग 142 एकड़ में चारागाह विकसित किया जा रहा है। चारागाह में मवेशियों को हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए नेपियर घास लगाया जाएगा। यह व्यवस्था हो जाने से मवेशियों को बेहतर स्थान मिल सकेगा। पशुओं के चारे की कमी नहीं होगी। जिले के सभी ब्लॉक चारागाहों में हरियाली लहलहाएंगी। सुपर हाइब्रिड नेपियर ग्रास की 8 लाख से ज़्यादा सेप्लिग (जड़) रोपित कराने जिले के सभी उपयुक्त गौठानो,केविके कृषि कालेज के 5-5 एकड़ में भी किया जा रहा है। इसके साथ 210 गौठानो में जिसमें तार फेंसिंग,पानी और सीपीडी है उनमें तथा नज़दीक ग्राम पंचायतों में खाली पड़ी चारागाह की भूमि पर सुपर हाइब्रिड नेपियर ग्रास लगाई जाएगी। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी ज़िला पंचायत श्री आकाश छिकारा, उप संचालक कृषि श्री एस.आर.डोगरे सहित कृषि से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे ।

इसकी खासियत यह है कि इसकी एक बार रोपाई के बाद पांच वर्ष तक कटाई की जाएगी, जिससे चरागाह में हरियाली समाप्त नहीं होगी और पशुओं को हरा चारा वर्ष भर मिलता रहेगा। वर्तमान में पशुपालन विभाग से 1.25 लाख एवं कृषि विज्ञान केन्द्र से 0.98 लाख नेपियर घास के रूट का वितरण किया जा चुका है तथा शेष लक्ष्य हेतु पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायतों को आवश्यक निर्देश दिया गया।

कलेक्टर  डोमन सिंह ने आज कृषि से जुड़े विभागों के ज़िला स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि इसके साथ जिले के गोठानों को बहुउपयोगी और बहुउद्देश्यीय कार्यस्थल के रूप में विकसित किया जाए। इससे और ज़्यादा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने फसल चक्र परिवर्तन के लिए भी कृषि विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि किसानों को इस दिशा में जागरूक कर कार्य योजना बनाई जाए। समीक्षा बैठक में कृषि, खाद्य, पशुधन, नागरिक आपूर्ति निगम, सहकारिता, केवीके , उद्यानिकी तथा मार्कफेड अधिकारी उपस्थित थे ।

कलेक्टर  सिंह ने ज़िले के गौठानो में गौवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं के लिए चारा, पानी, विश्राम एवं ईलाज का पुख्ता प्रबंध के साथ ही पशुओं के नस्ल सुधार एवं देखभाल की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि चारा-पानी एवं विश्राम की व्यवस्था होने से मवेशी आकर्षित हो रहें हैं और गौठान में जमावड़ा लगने लगा है। वही गौठान के बनने से गांव में पशुओं के आवारा घुमने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगी, जिससे सड़क दुर्घटना में भी कमी आएगी। गौठान बन जाने से ग्रामीणों को अपने मवेशियों को चराने की चिंता से मुक्त हुए है। ग्रामीण इलाक़े के बच्चे पढ़ाई भी कर रहे है ।

बैठक में पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि गोवंशों के लिए भूसे की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। जिले के चारागाह में सुपर हाइब्रिड नेपियर ग्रास की 8 लाख से ज़्यादा जड़ रोपित की जाएगी, जिसकी पांच वर्ष तक कटाई कराई जाएगी। इससे चारागाह में हरियाली बनी रहेगी और पशुओं को पर्याप्त चारा मिल सकेगा। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा भी गौठानो में नेपियर ग्रास लगाई जाएगी। इसके साथ ग्राम पंचायतों में खाली पड़ी चारागाह की भूमि पर सुपर हाइब्रिड नेपियर ग्रास की जड़ों की रोपाई कराने के दो माह बाद घास कटाई योग्य होती है। घास तैयार होने से गोवंशों को हरा चारा मिलता रहेगा और भूसे की खपत कम होगी। हरा चारा गोवंशों के लिए जरूरी है। इसमें सभी पोषक तत्व पाए जाते है।

कलेक्टर  डोमन सिंह ने कहा कि ज़िले में पशुपालन को बढ़ावा देने और दुग्ध उत्पादन की लागत कम करने के लिए हरे चारे के विकल्प के रूप में नेपियर घास का उत्पादन पर ज़्यादा ज़ोर है। एक बार बुआई के बाद करीब पांच साल तक इसका निरंतर उत्पादन लिया जा सकता है। जबकि मक्का, ज्वार आदि का हरा चारा सिर्फ तीन माह ही मिल पाता है। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों की ओर से नेपियर घास की इकाई विकसित करने के बाद किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ।

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