महासमुंद : राजनैतिक संरक्षण के चलते फल-फूल रहा अवैध चखना सेंटर का व्यापार !
महासमुंद जिले के कई व्हाट्सएप्प ग्रुप पर एक तस्वीर वायरल हुई है, जिसमे जिले के अलग-अलग शराब दुकान के बाहर की तस्वीर है, जिसे देखकर पता लगाया जा सकता है कि किस तरह नियमों का उलंघन खुले आम किया जा रहा है.
वैसे तो आबकारी विभाग कहने के लिए शराब दुकानो का संचालन कर रहा मगर विभाग के निरीक्षकों का एक अलग व्यवसाय और हो गया है वह है चखना सेंटर और शराब दुकानों के परिसर के बाहर नियम विरुद्ध पीने की सुविधा जिसमे रोजाना हजारों रुपये की अवैध कमाई हो रही है.

ये हम नहीं तस्वीर कह रही है, क्योकि जिस रास्ते से रोज विभाग का आना जाना लगा रहता है. जिस दरवाजे से वो मदिरा दुकान के अन्दर पहुँचते हैं ठीक उसी के बहार चखना सेंटर दिखाई देते हैं.
हलाकि इसके लिए सिर्फ आबकारी विभाग को जिम्मेदार ठहराना सरासर गलत है, राजनैतिक दबाव और संरक्षण के चलते भी अधिकारी कर्मचारी कई बार कार्रवाई नहीं करते हैं, जिसका कारण वोट बैंक है.
अवैध रूप से चखना सेंटर का संचालन करने वाले अक्सर गरीब लोग होते हैं, अधिकांश मदिरा प्रेमी दुकान से शराब खरीदने के बाद आस पास ही कोई जगह ढूंढते है जहाँ वे शराब पी सकें, ऐसे में वहीँ कुछ लोग अपनी दुकान लगा लेते हैं, जिनसे उनकी रोजी रोटी भी चलती है और मदिरा प्रेमियों को पीने का ठिकाना भी मिल जाता है.

हलाकि ऐसी स्थिति से कुछ आने-जाने लोगों को परेशानी होती है, सड़कों में ही शराब दूकान होने के कारण महिलाओं को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लेकिन वोट बैंक के चलते, राजनैतिक दवाब कहें या वसूली के बाद दिए जाने वाला संरक्षण, अवैध चखना सेंटर को हमेशा से ही सत्ता में मौजूद जनप्रतिनिधियों द्वारा नजरअंदाज किया जाता रहा है.
कुछ महीने पूर्व बसना नगर पंचायत के अंतर्गत आने वाले शासकीय शराब दुकान के बाहर एक भी चखना सेंटर देखने को नहीं मिलते थे, जिसका कारण सीधे तौर पर तत्कालीन थाना प्रभारी वीणा यादव का सख्त रवैया रहा था, हलाकि उनके जाती ही फिर से खेतों में और शराब दुकान के बहार चकना सेंटर संचालित होने लगे थे.

सूत्रों की माने तो शासकीय शराब दुकान के बाहर चखना सेंटर खोलने के लिए कई बार थाना प्रभारीयों पर राजनैतिक दबाव भी रहता है जिसके चलते कार्रवाई नहीं हो पाती. हलाकि अधिकारी यदि दबाव में ना आये और पूरी इमानदारी निष्ठा से कार्य करे तो जिले में एक भी शराब दुकानों के बहार चखना सेंटर नजर नहीं आयेंगे. अन्यथा एक दिन ऐसा आएगा जब जहां कई जगह दीवालों पर “पीने की सुविधा उपलब्ध” लिखवा दिया जायेगा.