कभी नेता की दबंगई.... तो कभी वर्दी वालों की गुंडागर्दी.... छ... - CG Sandesh

कभी नेता की दबंगई.... तो कभी वर्दी वालों की गुंडागर्दी.... छत्तीसगढ़ में फल फुल रहा पावर का नशा...

प्रदेश में नशा सिर्फ नशा का ही नहीं बल्कि, नेता और छोटे अधिकारियो में पावर का नशा भी दबंगई से फल फूल रहा है. हर दूसरे दिन कोई न कोई अधिकारी, नेता खबरों में छपते रहते है. कभी किसी पार्षद, सरपंच या कोई नेता जो ट्रैफिक पुलिस को धमकी देते हुए अखबारों की लाइन में आते ही रहते है तो क्या यह कहना और सोचना वाजिब नहीं होगा कि, कैसे अधिकारी और नेता बनते ही लोगो के व्यवहार में गर्दी आ जाती है. चुनाव के समय में पार्टी कार्यकर्ता के जितने संयम और समाज सेवा से भरते हुए पोर्टलों और अखबारों में खबर मिलती है, तो बाकी समय अपने अलग अंदाज़ में धमकी वसूली करते अधिकारी व युवा नेता भी दिखाई देता हैं, इन सब में इनके शिकार होती है तो आम जनता.

इसे पावर का नशा का नशा नहीं तो और क्या कहें सूरजपुर में हुए लाकडाउन के समय एक कलेक्टर का छात्र को चांटा मरना, वही कही पार्षद तो कहीं नेता का नौकरी के नाम पर ठगी करना. अपने पद पर आने से पहले अगर व्यक्तियों के भाव में संयम रही है तो शायद अफसर की नौकरी करते या फिर नेता बनते ही इनकी हिम्मत और बढ़ जाती है. या फिर ये कहे की आगामी भविष्य योजनाओ में उभरते कुछ अधिकारियो ने दबंगई को ही अपने योजनाओ में शामिल किया था. एक बार नजर डाले तो अधिकतर अधिकारियो को उनके बुरे व्यवहार के चलते लाइन अटैच किया गया है. ज्यादा से ज्यादा ट्रांसफर वही निलंबित होने वाले अफसर के आकड़ो में कमी नहीं है.अपराध की श्रेणी में आने वाले अपराधी और इन्ही श्रेणी में आने वाले अफसर और नेता, क्या न्याय व्यवस्था में रहने वाले को छूट दी गयी है. या नेतागण पार्टी कार्यकर्ता अपने अधिकारों के समक्ष उस योग्य नहीं है. खैर लोग तो आते जाते रहते है. फिर व्यवस्था इमरजेंसी की भी तो पहले से है ही.


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