जिला जेल महासमुंद में 10 सितंबर विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जन जागरूकता अभियान चलाया गया.
जिला जेल महासमुंद में। 10 सितंबर विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जन जागरूकता अभियान चलाया गया। महासमुंद दिनांक 11 सितंबर दिन शनिवार को 10 सितंबर विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर स्पर्श क्लिनिक महासमुंद में मानसिक स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मानसिक रोग मरीजो को परामर्श दिया गया की जीवन में कभी हार नहीं माननी है। अगर आपके 99 वें दरवाजा बंद है तो 1 दरवाजा खुला है।
जो की आपकी मदद के लिये है। मानसिक तनाव में आकर डिप्रेसन का शिकार हो जाते हैं। इसका निजात पा सकेंगे। मानसिक रोग यह अन्य रोग की तरह है। किसी भी प्रकार झाड़ फूंक से ठीक नही होता यह मनोरोग चिकित्सा। मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता एवं मनोवेज्ञनीक की आवश्यकता पड़ती हैं। समाज में भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है। सभी जिला अस्पताल।सामुदयिक केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो में सलाह ले सकते हैं।
कोरोना काल में मानसिक स्वास्थ्य के मरीज में हूई बड़ोतरी । कोरना काल में व्यक्ति तनाव ग्रस्त हो गये थे। कई एसे मरीज पुर्व में मानसिक स्वास्थ्य ठीक नही था। उसको ज्यादा परेशानी हूई है। लोगो में कोरोना जेसे बडा बिमारी से जूझ रहे थे। जो की चिंता का विषय था। पोस्ट कोविड मानसिक स्वास्थ्य हेतू परामर्श दिया जा रहा है। मानसिक स्वास्थ्य परामर्श के लिए नि:शुल्क 104 पर फोन कर सहायता ले सकते हैं ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एन के मंडपे और डॉ छत्रपाल चंद्राकर नोडल अधिकारी मानसिक। तिकेसवरी गोस्वामी मनोवेज्ञनीक, टेकलाल नायक मानीटरिंग, जागृति साहू स्टाफ नर्स, देवकुमार डडसेना योगा मास्टर।लिलि मजखंड एवं भुमिका पटेल प्रशिक्षण प्राप्त करें रहे।
मानसिक स्वास्थ्य विश्व आत्म हत्या रोकथाम पर योगा के मध्यम से मानसिक तनाव ग्रस्त को योगा सिखाया गया। मानसिक स्वास्थ्य शिविर में 80 से 90 लोग उपस्थित हुये जिसमें 45 मानसिक रोग मरीजो को नि:शुल्क दवाई के साथ मनो सामाजिक परामर्श दिया गया ।
जिला चिकित्सालय मनोरोग विभाग द्वारा बंदी को जागरूकता अभियान चलाया गया चित्र के माध्य से आत्मह्त्या को कम केसे कम करे। मानसिक तनाव होने पर विचारो को आदान प्रदान करे। दु:ख बाटने से दु:ख कम होता हैं। नेतिक मूल्य को जानने का प्रयास करे। लगभग 440 बंदी थे। जिसमें 110 बंदी को मानसिक स्वास्थ्य शिविर में परामर्श दिया। बंदी द्वारा खुद ही मानसिक तनाव में आकर एसे कदम उठाया गया जो की मेरा प्रत्यक्ष उदाहरण है। जो आज में उस कठिन परिस्थति को सामना कर पाया। जिला जेल में बंदी को हर माह 10 तारीख को मानसिक स्वास्थ्य जांच परामर्श शिविर लगाया जाता है।
कार्यक्रम में मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता रामगोपाल खूँटे द्वारा जन जागरूकता अभियान चलाया गया।