मानसून में महासमुंद : 300 मीटर ऊंचा जलप्रपात.....पहाड़ी के चोटी मे महादेव जी व नीचे एक महामाया देवी जी का मंदिर....जिले का सबसे ऊँचा पर्वत शिशुपाल पर्वत
मानसून में महासमुंद जिले के सरायपाली में स्थित शिशुपाल पर्वत पर लगातार स्थानीय व पर्यटकों की भीड़ बढ़ती जा रही है...यहां की मनमोहक दृश्य में लोग रमने पहुँच रहे है...यहां अति प्राचीन मंदिर भी है जो देखरेख के अभाव में अपनी पहचान खो रहा है। यह स्थल पर्वत के तलहटी में वन विभाग द्वारा स्थापित नर्सरी, हिंदू बाबा द्वारा निर्मित मंदिर व आश्रम व दूर से दिखने वाला सैकड़ो फिट ऊंचाई से गिरने वाले जलप्रपात से दिखने वाला घोडाधार के पानी की धार, पर्वत के ऊपर विशालकाय मैदान व प्राचीन मंदिर इसे पिकनिक स्पॉट के रूप में पहचान बताता है। इसी तलहटी में शरद पूर्णिमा के साथ साथ वर्ष में कई बार विभिन्ना धार्मिक आयोजन होते हैं। इसी वजह से यह स्थल पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा है और इसी वजह से सैकड़ों सैलानियों के यहां आवाजाही होने व खाने पीने के सामानों के साथ से इस स्थल पर कूड़ा करकट एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थ तेजी से फैल रहा था और पूरा परिसर और पर्वत का ऊपरी हिस्सा भी काफी गंदा हो चुका था।
पर्वत के शिखर पर बहने वाली सदा वाहिनी घोड़ाधार जल प्रपात के आसपास भी कूड़ा करकट फैले होने से जलप्रपात का पानी भी प्रदूषित हो रहा था।
3 साल पहले की गयी थी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग
फुलझर
अंचल की पूर्वी सीमा पर स्थित शिशुपाल पर्वत को पर्यटन स्थल के रूप में
विकसित करने मांग शिशुपाल सेवा समिति घोडाधार ने की थी। समिति के अध्यक्ष
उमाकांत मिश्रा ने बताया कि इस मांग को लेकर पूर्व में मुख्यमंत्री जनदर्शन
में आवेदन दिया गया था। इस मांग के आधार पर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के
महाप्रबंधक ने 3 अक्टूबर को कलेक्टर महासमुंद से शिशुपाल पर्वत का परीक्षण
कराकर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पत्र लिखा था कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता का
कहना
था
ki एक टीम बनाकर उक्त जगह का परीक्षण करवाएंगे।
मिश्रा का कहना
था कि फुलझर अंचल में स्थित शिशुपाल पर्वत (बुढा डोंगर) में कई ऐतिहासिक
धरोहर के साथ साथ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। पर्वत की स्थिति एवं
भौगोलिक संरचना लोगों को आकर्षित करती है। पर्वत के पूर्वी भाग में स्थित
घोड़ाधार जलप्रपात लगभग 11 सौ फीट की ऊंचाई से झरने के रूप में गिरती
है।पर्वत ऊपर स्थापित शिव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्रति वर्ष मकर
संक्रांति व महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां मेला लगता है। इस मेले में
हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। पुजारीपाली के पास वन विभाग ने
नर्सरी प्लांट तैयार किया है जिसे विकसित किया जा सकता है।
पिछले साल हुई थी एक व्यक्ति की गिरने से मौत
सरायपाली
से करीब 30 किमी दूर स्थित शिशुपाल पर्वत स्थित घोड़ाधार की खाई में गिरने
से एक युवक की मौत हो गयी थी...आसपास के लोगों की माने तो शिशुपाल पर्वत
स्थित घोड़ाधार सुसाइड पाइंट के नाम से भी जाना जाता है..