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छत्तीसगढ़ में सरकार की रुख से अनियमित कर्मचारियो में बड़ रहा है मानसिक तनाव, उपाय नियमितिकरण

महासमुंद: महासमुंद मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता रामगोपाल खूँटे छ्त्त्तीसगढ राज्य सभी दृष्टिकोण कोण से सम्पन्न माना जाता है। यह की अर्थिक स्थिति अन्य राज्यो से बेहतर है। परंतु छ्त्त्तीसगढ में मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर उस अनिमित कर्मचारीयो के ऊपर मन में खतरा मनडरा रहा है। उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्को दर दर नौकरी व्यवसाय को लेकर भटकना पड़  रहा हैं। उन्को जब चाहे नौकरी से निकाल देते है। किसी प्रकार की सामाजिक, अर्थिक, जाब की सूरक्षा, नही है। किसी प्रकार उन्को चिकित्सा सुइधा नही मिल पाता। समय पर नियमित वेतन न मिलपाना। समय के पहले प्रोजेक्ट, मिशन खत्म हो जाना। सरकारी कर्मचारियो का दबाव। ऊचे पद पर आसिन नीचे पद वाले को तुच्छ समझना। किसी न किसी कारणों से मानसिक अर्थिक रूप से  प्रताड़ित करना। सविदा देनिक भोगी, प्लेस मेंट, ठेका, अंस कालीन, जीवन दीप, आउट सोर्शींग अनिमित कर्मचारी है। सरकार  राज्य कर्मचारी नही मानते हैं। न ही केंद्र के कर्मचारी। आज 15 से 20 वर्षो से अधिक समय तक एसे कर्मचारी जो अनिमित के रूप में काम कर रहे है। कई एसे कर्म चारी है जिसका उम्र समाप्त हो गई है।

अन्य नौकरी पर फार्म भरने से अनुचित है। किसी प्रकार से सुरक्षा का अभाव नजर नहीआती है। शासन प्रशासन से आशा रहती है, की समय समय पर महँगाई के अधार पर वेतन बृद्धि हो प्रमोशन हो। या सरकार नियमित पदो पर समायोजन कर सके। उन्को सम्मान जनक प्राथमिकता दे सके। यह शासन प्रशासन को सोचने का विषय है। वर्तमान में ये सब समस्याओ के चलते मानसिक तनाव बड रही हैं। कर्मचारियो अधिकारियो के बीच ताना शाही रवेया रह्ता है । इसका असर सीधा प्रभाव अनिमित सविदा जेसे कर्मचारीयो के शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे है। आत्महत्या के शिकार हो रहे है। अनिमित कर्मचारी न तो अपना निवास जा सकता। न ही होम लोन, उच्च शिक्षा हेतू बच्चों की पढ़ाई या चिकित्सा सुविधा, अनुकम्पा नियुक्ति, अर्थिक, समाजिक सुरक्षा का अभाव रह्ता है। सरकार चुनाव के समय घोषणा पत्र में शामिल करते है, बड़ी बड़ी वादे करते है। समय के रहते हए 5 साल 10 साल और 15 साल हो जाता है।

 पर भूलने कोशिस करते है। इस विषम परिस्थितियों से कोरोना जेसे महामारी से हर व्यक्ति गुजर रहा है। एसे परिस्थति में भी सविदा,अनिमित कर्मचारी अपने जीवन से खो बैठे है। पर उनकी परिवार को किसी प्रकार से सुरक्षा नही मिल पाया। न तो नौकरी बची न तो जीवन ब्लकि परिवार सदमे में आकर मानसिक स्थिति खराब हो गई और आत्महत्या जेसे कदम उठाने के लिये विवस हो गये।

 शासन प्रशासन से यही उम्मिद और प्रार्थना है कि हमारी बातो को गम्भीरता से ले। इस समय माननीय श्री भूपेश बघेल मुख्यमंत्री छ्त्त्तीसगढ शासन और बाबा श्री टीएस सिंह देव स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री पद आसीन हैं। इस मुद्दे पर जन हित में ध्यान रखते हुए कार्यवाही कर सके। जिसे किसी भी प्रकार से सुरक्षा का अभाव न हो। इस सरकार से उम्मिद भी है की अच्छा होगा। जिसे सबका भला हो एसे डिसीजन ले। सबका शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहे। घर परिवार में परिस्थति का कलंक न हो।
लेखन कर्ता मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता रामगोपाल खूँटे जिला महासमुंद छ.ग.

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