महासमुन्द: राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना: जिले में 24 दिन में 29800 हितग्राहियों से आवेदन प्राप्त हुए
महासमुन्द: राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर
न्याय योजना के पंजीयन की शुरूआत (1 सितम्बर) से अब तक महासमुंद जिले में अनुमानित लक्ष्य
64568 के विरूद्ध 24 दिन में 29788 आवेदन प्राप्त हुए है यह
लक्ष्य का 46 प्रतिशत् से अधिक है। इस योजना के तहत् भूमिहीन कृषि
मजदूरों को लाभ मिलेगा। प्रत्येक परिवार के लिए 6000 रुपए हर साल अनुदान राशि
सीधे उनके बैंक खातें में आएगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने चालू माह की पहली
तारीख (1 सितम्बर) को राजीव गांधी
ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के पंजीयन के शुरूआत का शुभारम्भ किया था।
छत्तीसगढ़ राज्य में जरूरतमंदों को न्याय और लाभ दिलाने की यह एक अच्छी पहल है।
महासमुन्द जनपद पंचायत के
105 ग्राम पंचायतों में
सर्वाधिक अब तक 8329 हितग्राहियों ने पंजीयन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया
है। सरायपाली जनपद पंचायत के 107 ग्राम पंचायतों 6610, पिथौरा के 126 ग्राम पंचायतों में 6064, बसना के 102 ग्राम पंचायतों में 4520 लोगों ने आवेदन प्रस्तुत
किए है। वहीं बागबाहरा के 111 ग्राम पंचायतों में 4265 हितग्राहियों ने आवेदन
लगाए है। इस प्रकार अब तक कुल 29788 लोगों ने पंजीयन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है।
आवेदन पंजीयन का काम आगामी 30 नवम्बर तक चलेगा। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसमें भूमिहीन कृषि
मजदूरों के लिए यह योजना लागू की है।
छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण आबादी का एक बड़ा हिस्सा
कृषि पर निर्भर है। कृषि मजदूरी कार्य में ग्रामीणों में अधिकतर लघु सीमांत अथवा
भूमिहीन कृषक है। इसमें भूमिहीन कृषि मजदूर को अन्य की अपेक्षा रोजगार के कम अवसर
ग्राम स्तर पर उपलब्ध होते है। राज्य शासन द्वारा ऐसे वर्ग को मजबूती प्रदान करने
के लिए यह योजना लायी है। यह योजना चालू वित्तीय वर्ष 2021-22
से ही प्रारम्भ की गयी
है। योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की
पहचान करना तथा भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को वार्षिक आधार पर आर्थिक अनुदान
देना है। आर्थिक अनुदान के जरिए भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के शुद्ध आय में भी
वृद्धि होगी।
यह योजना प्रदेश के सभी
जिले में लागू होगी। क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में राज्य स्तर पर आयुक्त/संचालक
भू अभिलेख एवं जिला स्तर पर कलेक्टर के देखरेख में योजना का क्रियान्वयन किया
जाएगा। यह योजना छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में
ऐसे सभी मूल निवासी भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु
पात्र होंगे जिस परिवार के पास कृषि भूमि नहीं हैै। इसके अलावा पट्टे पर प्राप्त
शासकीय भूमि यथा वनाधिकार प्रमाण पत्र को कृषि भूमि माना जाएगा। इस योजना में ग्रामीण
कृषि भूमिहीन मजदूर परिवारों के अंतर्गत चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, पुरोहित जैसे पौनी पसारी
व्यवस्था से जुड़े परिवार वनोपज संग्राहक तथा शासन द्वारा समय-समय पर नियत अन्य
वर्ग भी पात्र होंगे यदि उस परिवार के पास कृषि भूमि नहीं है। इस योजना में हितग्राही
परिवार के मुखिया द्वारा निर्धारित फॉर्म भरा जाएगा.