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आय से अधिक संपत्ति मामले में रेंजर को 5 वर्ष सश्रम कारावास व अर्थदंड की सजा

दुर्ग। भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी रेंजर को 5 वर्ष सश्रम कारावास व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। फॉरेस्ट रेंजर शंकर दास के ठिकानों पर नवंबर 2016 में मारे गए छापों में एसीबी को वैध कमाई से कहीं अधिक मूल्य की संपत्ति मिली थी। जिसके बाद एसीबी ने जांच कर चालान विचारण हेतु न्यायालय में प्रस्तुत किया था जिसमें आरोपी रेंजर को सजा सुनाई गई है।

जानकारी के अनुसार कांकेर के मूल निवासी 51 वर्षीय शंकर दास वन विभाग में रेंजर के पद पर पदस्थ है। 10 नवंबर 1993 को वन विभाग में उनकी नियुक्ति हुई थी। वर्ष 2016 में शंकर दास धमधा परिक्षेत्र में रेंजर के पद पर पदस्थ थे। इस दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो ने उनके ठिकानों पर नवंबर 2016 में दबिश दी थी तथा रेंजर व उनकी पत्नी व अन्य परिजनों के नाम बड़ी मात्रा में चल-अचल संपत्ति होने का खुलासा किया था। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि 10 नवंबर 1993 को वन विभाग में नियुक्ति के बाद छापा मारने तक की तिथि तक शंकर दास ने 23 वर्ष की सेवा वन विभाग में दी है।

 

 


इन 23 वर्ष के कार्यकाल में उन्हें वेतन तथा विभिन्न माध्यमों से कुल 39 लाख 74 हजार 340 रुपए की आय अर्जित हुई थी। वहीं जांच में 85 लाख 37 हजार 668 रुपये की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ था। इस प्रकार से वैध स्त्रोतों के अतिरिक्त 45 लाख 63 हजार 328 रुपए की अतिरिक्त संपत्ति रेंजर के द्वारा भ्रष्टाचार कर अर्जित किया जाना पाया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो ने प्रकरण की जांच पूरी कर न्यायालय के समक्ष चालान विचारण हेतु प्रस्तुत किया था।

प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक जाहिदा परवीन पैरवी कर रही थी। मामले में कल शुक्रवार को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश आदित्य जोशी ने अपना फैसला सुनाया। विचारण पश्चात न्यायालय ने भ्रष्टाचार के आरोप में अभियुक्त रेंजर शंकर दास को दोषी मानते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) (ई) तथा 13 (दो) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास व दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किए जाने का फैसला किया है।



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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