छत्तीसगढ़ में भी चुनाव आयोग से मतदान तिथि बदलने की मांग…पढ़े ... - CG Sandesh

छत्तीसगढ़ में भी चुनाव आयोग से मतदान तिथि बदलने की मांग…पढ़े पूरी खबर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है निर्वाचन आयोग की ओर से प्रदेश में 7 और 17 नवंबर को मतदान की तिथि तय की गई है

और अब आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव ने ज्ञापन सौंपकर चुनाव आयोग से मांग करते हुए कहा कि छठ पर्व और चुनाव आसपास होने से प्रदेश के मतदाता पशोपेश की स्थिति में हैं। चुनाव आयोग को चाहिए कि विधानसभा चुनाव की तिथि को आगे बढ़ा दी जाए।

उत्तम जायसवाल ने निर्वाचन आयोग से प्रदेश में 17 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के तिथि को आगे बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दरअसल, 17 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान होना है।



मतदान के दिन छठ महापर्व को देखते हुए प्रदेश की जनता दुविधा और परेशानी की स्थिति में हैं। चुनाव आयोग को चाहिए कि चुनाव की तिथि बढ़ाने की मांग पर संज्ञान लेते हुए इस द्विविधा से निजात दिलाएं।

वहीं आम आदमी के नेता कोमल हुपेंडी ने कहा कि राजस्थान में चुनाव आयोग शादियों और देव उठनी एकादशी की वजह से तारीख में बदलाव कर 23 नवंबर को होने वाले मतदान की तारीख को आगे बढ़ाकर 25 नवंबर कर दिया है।

तब छत्तीसगढ़ में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी मामला राजस्थान प्रदेश की तरह ही जनभावना से जुड़ा हुआ है। जिस पर तत्काल प्रभाव से निर्वाचन आयोग को सुनवाई करनी चाहिए।

कोमल हुपेंडी ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में बिहार-झारखंड के लाखों परिवार रहते हैं। ऐसे में छठ पर्व के दौरान वो छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भागीदारी नहीं कर पाएंगे। जिससे प्रदेश के मत-प्रतिशत में सीधा-सीधा असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि सरगुजा संभाग में धूमधाम से छठ त्यौहार मनाया जाता है। छठ महापर्व के कारण हजारों लोग मतदान देने से वंचित हो जाएंगे। इसलिए तारीख को आगे बढ़ाने को कहा जा रहा है। निर्वाचन आयोग को मामले की गंभीरता को समझते हुए चुनाव तिथि को बदलकर प्रदेश की जनता को राहत देनी चाहिए।



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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