भाजपा एजेंसियों की मदद से चुनाव लड़ रहीः भूपेश - CG Sandesh

भाजपा एजेंसियों की मदद से चुनाव लड़ रहीः भूपेश

ईडी के आंकड़े को भूपेश बघेल ने बताया झूठा, मनगढ़ंत आरोप हैं…

रायपुर। ईडी को लेकर फिर पक्ष और विपक्ष में वार पर पलटवार का खेल शुरू हो गया है। सीएम भूपेश ने कहा कि ईडी झूठे आंकड़े इसीलिए जारी कर रही है जिससे कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार को बदनाम करने के लिए भाजपा को हथियार मिल सके। पर ये पब्लिक है डॉक्टर साहब! ये सब जानती है। वो देख रही है कि कैसे भाजपा ईडी, आईटी और सीबीआई जैसी एजेंसियों की सहायता से चुनाव लड़ना चाहती है।

ईडी के आंकड़े को भूपेश बघेल ने झूठा बताया हैं। राईस मिलर के यहां पड़ी रेड पर सीएम भूपेश बघेल का कहना है कि ईडी ने एक बार फिर मनगढ़ंत आरोप लगाकर भाजपा को एक चुनावी मुद्दा दिया है। अमित शाह के इशारे पर अबकी बार वे चावल घोटाले की बात कर रहे हैं। रमन सिंह 15 साल मुख्यमंत्री रहे हैं। पर उनके बयान से ज़ाहिर है कि उन्हें कामकाज का अंदाज़ा अभी भी नहीं हुआ है।


कस्टम मिलिंग के चार्ज तो वर्ष 2022-23 से ही बढ़ाए गए हैं यानी अभी एक ही साल का भुगतान हुआ है। तो चार साल के घोटालों का हिसाब कहां से आ गया? ईडी ने 10-12 राइस मिलरों से बयान लेकर अनुमान लगा लिया है, अगर एजेंसी 2,200 मिलरों के बयान दर्ज कर ले फिर किसी आंकड़े की बात करे। सरकार को बदनाम करने के लिए आंकड़े जारी न करे।

रमन सिंह जब प्रदेश के मुखिया थे तो हर साल किसानों से खरीदे गए 60-70 लाख टन धान की मिलिंग भी नहीं हो पाती थी। सुखत, चोरी, ब्याज़, संग्रहण केंद्रों के रखरखाव और धान के ख़राब होने से हर साल सैकड़ों करोड़ का नुक़सान होता था।

वे जनता को यह नहीं बताएंगे कि कस्टम मिलिंग की नई प्रणाली शुरु होने के बाद 97 लाख टन धान का उठाव बरसात से पहले ही हो गया और राज्य की 2000 करोड़ रुपयों की बचत हुई है।


भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को चुनौती देता जनसंपर्क विभाग, पीजीपोर्टल, जनशिकायत, सीएमहेल्पलाइन लाइनपर की गई शिकायत सब बेअसर

पीजी पोर्टल में शिकायत के बाद भी नहीं मिल रहा न्याय, जाँच प्रणाली में सुधार की आवश्यकता, आजादी के 79 साल बाद भी शिकायत के जाँच में स्वतंत्रता नही.


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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