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छत्तीसगढ़ विधानसभा निर्वाचन 2023 : निगरानी दलों ने 30 करोड़ 52 लाख रूपए की नगदी और वस्तुएं की जब्त

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदर्श आचार संहिता लागू होने से लेकर 23 अक्टूबर तक की स्थिति में 30 करोड़ 52 लाख 32 हजार रूपए की अवैध धन राशि तथा वस्तुएं जब्त की गई है, जिसमें 8 करोड़ 13 लाख 43 हजार रूपए की नगद राशि शामिल हैं।


मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रवर्तन एजेंसियों (इन्फोर्समेंट एजेंसीज) द्वारा निगरानी के दौरान 23 अक्टूबर तक 21 हजार 838 लीटर अवैध शराब जब्त की गई है, जिसकी कीमत 66 लाख 43 हजार 444 रूपए है। साथ ही 2731 किलोग्राम अन्य नशीली वस्तुएं जिसकी कीमत लगभग 2 करोड़ 16 लाख 66 हजार 577 रुपए है भी जब्त किया गया है। सघन जाँच अभियान के दौरान 14 करोड़ 25 लाख 14 हजार रूपए कीमत के 158 किलोग्राम से अधिक कीमती आभूषण तथा रत्न भी तलाशी के दौरान जब्त किया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य सामग्रियां जिनकी कीमत 5 करोड़ 30 लाख 64 हजार 561 रूपए है भी जब्त की गई हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रीना बाबा साहेब कंगाले ने विधानसभा निर्वाचन 2023 में कानून व्यवस्था बनाए रखने के आवश्यक कार्यवाही किए जाने के संबंध में सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं। उक्त जारी निर्देशों के परिपालन में राज्य में विभिन्न प्रवर्तन ऐजेंसी के माध्यम से धन और वस्तुओं की अवैध परिवहन तथा संग्रहण पर कड़ी नजर रखी जा रही है। छत्तीसगढ़ विधानसभा निर्वाचन 2023 अंतर्गत प्रदेश में निगरानी दलों की सघन जाँच की कार्रवाई लगातार जारी है।



भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को चुनौती देता जनसंपर्क विभाग, पीजीपोर्टल, जनशिकायत, सीएमहेल्पलाइन लाइनपर की गई शिकायत सब बेअसर

पीजी पोर्टल में शिकायत के बाद भी नहीं मिल रहा न्याय, जाँच प्रणाली में सुधार की आवश्यकता, आजादी के 79 साल बाद भी शिकायत के जाँच में स्वतंत्रता नही.


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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