पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने जनजाति समाज से मुख्यमं... - CG Sandesh

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने जनजाति समाज से मुख्यमंत्री चुने जाने पर जताई प्रसन्नता - नए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को दी बधाई

जनजाति समाज से बने मुख्यमंत्री आदिवासी इलाकों की चुनौतियों, परिस्थितियों और मनोभाव को समझेंगे - अरविंद नेताम

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आदिवासी नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद नेताम ने श्री विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री चुने जाने पर बधाई दी है। उन्होंने खास तौर पर देश के केंद्रीय नेतृत्व को बधाई देते हुए कहा है कि जनजाति क्षेत्र से मुख्यमंत्री चुने जाने से वह आदिवासी इलाके की चुनौतियों, परिस्थितियों और मनोभाव को समझेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री साय जनजाति समाजों से बातचीत कर आदिवासी क्षेत्रों के विकास को नई गति देंगे। उन्होंने कहा कि जनजाति समाज से द्रोपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना और छत्तीसगढ़ में जनजाति समाज से विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलना समाज के लिए बड़ी बात है।
नेताम ने कहा कि जनजाति वर्ग के लोग कम कहते है और करते अधिक हैं। इसी तरह नए मुख्यमंत्री साय भी काम करेंगे। वे जनजाति समाज से होने के कारण समाज के मनोभाव को समझेंगे।

नेताम ने कहा कि आदिवासी इलाके के विकास के लिए उन्हें अन्य क्षेत्रों से अलग देखना आवश्यक है। सामान्य तौर पर विकास को औद्योगीकरण से मापा जाता है। अवधारणा है कि औद्योगीकरण होगा तो विकास होगा। उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण आवश्यक है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों का विनाश नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जनजाति समाज की भावना को गहराई से समझेंगे और उनसे बातचीत कर आदिवासी क्षेत्रों के लिए विकास की नई राह गढे़ंगे।

नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले सालों में जनजाति समाज के विकास को लेकर उनका अनुभव अच्छा नहीं रहा। सरकार और जनजाति समाज के बीच संवादहीनता रही है। विष्णुदेव साय के मुख्यमंत्री बनने से उम्मीद है कि यह संवादहीनता खत्म होगी।

भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को चुनौती देता जनसंपर्क विभाग, पीजीपोर्टल, जनशिकायत, सीएमहेल्पलाइन लाइनपर की गई शिकायत सब बेअसर

पीजी पोर्टल में शिकायत के बाद भी नहीं मिल रहा न्याय, जाँच प्रणाली में सुधार की आवश्यकता, आजादी के 79 साल बाद भी शिकायत के जाँच में स्वतंत्रता नही.


अन्य सम्बंधित खबरें